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जिंदगी पर कहे गए ये 25 शेर आपको महका देंगे... 

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  शायर बड़े जिंदादिल होते हैं। फक्कड़ स्वभाव उनकी जिंदादिली में बेशुमार रंग भर देता है। उनके बोल और शेर जीवन को महका देते हैं। जिंदगी का गहरा अनुभव और उसके दर्शन को सभी शायरों ने शिद्दत से महसूस किया है। हम यहां जिंदगी से संबंधित 25 बड़े शेर आपकी नजर कर रहे हैं।     
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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गर्म सूरज को समुंदर में डुबोया जाए...

कुछ तो हो रात की सरहद में उतरने की सज़ा
गर्म सूरज को समुंदर में डुबोया जाए
-शाहिद कबीर 

न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है
अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

 

ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए...

मैं सोचता हूँ बहुत ज़िंदगी के बारे में
ये ज़िंदगी भी मुझे सोच कर न रह जाए
-अभिषेक शुक्ला


यूँ तो मरने के लिए ज़हर सभी पीते हैं
ज़िंदगी तेरे लिए ज़हर पिया है मैंने
-ख़लील-उर-रहमान आज़मी

पी गए कुछ और कुछ छलका गए...

ज़िंदगी इक आँसुओं का जाम था
पी गए कुछ और कुछ छलका गए
-शाहिद कबीर

बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
-फ़िराक़ गोरखपुरी  

 

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है...

ये वार कर गया है पहलू से कौन मुझ पर
था मैं ही दाएँ बाएँ और मैं ही दरमियाँ था
-जौन एलिया 

दिल ना-उमीद तो नहीं नाकाम ही तो है
लम्बी है ग़म की शाम मगर शाम ही तो है
-फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा...

बीमार को मरज़ की दवा देनी चाहिए 
मैं पीना चाहता हूँ पिला देनी चाहिए 
-राहत इंदौरी 

आँख से दूर न हो दिल से उतर जाएगा
वक़्त का क्या है गुज़रता है गुज़र जाएगा
-अहमद फ़राज़

वो एक चेहरा तो नहीं सारे जहां में 
जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता 

मैं अपनी ही उलझी हुई राहों का तमाशा
जाते हैं उधर सब, मैं उधर क्यों नहीं आता 
निदा फाजली 

गरीब के मकानों में सियासत खूब चलती है 
कहीं पर आग रख देना कहीं पर चांदनी रखना 
-इंतजार गाजीपुरी 

खैर गुजरी कि तू नहीं दिल में 
अब कोई आरजू नहीं दिल में 
-अल्हड़ बीकानेरी 

हर खुशी की आंख में आंसू मिले 
एक ही सिक्के के दो पहलू मिले
अपने अपने हौसले की बात है 
सूर्य से लड़ते हुए जुगनू मिले 
-जहीर कुरैशी 

अनोखी वजह है सारे जमाने से निराले हैं 
यह आशिक कौन सी बस्ती के यारब रहने वाले हैं 
अल्लामा इकबाल 

इक चीज थी जमीर जो वापस न ला सका
लौटा तो है जरूर वो दुनिया खरीद कर 
-कमर इकबाल 

हर एक बच्चा अदब करने लगा है 
बुढ़ापा मुझमें शायद आ गया है 
-सैय्यद सईद अख्तर

कलाम करते हैं दर, बोलती हैं दीवारें 
अजीब सूरतें होती हैं इंतिजार में भी 
महशर बदायूंनी 

दुश्मनी का सफर एक कदम दो कदम 
तुम भी थक जाओगे हम भी थक जाएंगे 
बशीर बद्र

अजीब शख्स है नाराज हो के हंसता है 
मैं चाहता हूं खफा हो तो वो खफा ही लगे 
बशीर बद्र 

रात बाकी थी जब वो बिछड़े थे 
कट गई उम्र, रात बाकी है 
खुमार बाराबंकवी

यूं न मुरझा कि मुझे खुद पे भरोसा न रहे 
पिछले मौसम में तेरे साथ खिला हूं मैं भी 
मजहर इमाम 

ये एक अब्र का टुकड़ा कहां कहां बरसे 
तमाम दश्त ही प्यासा दिखाई देता है 
शकेब जलाली 

कोई आज तक न समझा कि शबाब क्या है 
यही उम्र जागने की यहीं नींद का जमाना
-नुसूर वाहिदी 
 
मैं सो भी जाऊं तो क्या, मेरी बंद आंखों में
तमाम रात कोई जागता लगे हैं मुझे  
जां निसार अख्तर 
 

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