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ये हैं 15 बेहतरीन फिल्मी शेर...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  ये हैं 15 बेहतरीन फिल्मी शेर...

हिंदी फिल्मों और शेरों-शायरी का चोली दामन का साथ रहा है। इज़हार-ए-मोहब्बत से लेकर वतनपरस्ती तक, रोमांस से लेकर कहानी के हर मोड़ पर शेरों -शायरी की एक भूमिका रही है जिसकी वजह से कई फिल्में यादगार बन गईं। पेश है फिल्मों में कहे गये लोकप्रिय शेर- 

1-बहुत पहले से उन क़दमों की आहट जान लेते हैं
तुझे ऐ ज़िंदगी हम दूर से पहचान लेते हैं
- फिराक गोरखपुरी 
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अंगड़ाई भी वो लेने न पाए

2-अंगड़ाई भी वो लेने न पाए उठा के हाथ
देखा जो मुझ को छोड़ दिए मुस्कुरा के हाथ
-निज़ाम रामपुरी 

3-ख़ुद अपनी मस्ती है जिस ने मचाई है हलचल
नशा शराब में होता तो नाचती बोतल
-आरिफ़ जलाली 

4-देर लगी आने में तुम को शुक्र है फिर भी आए तो
आस ने दिल का साथ न छोड़ा वैसे हम घबराए तो
-अंदलीब शादानी

जिनके आने से रोशन हुए चिराग 

5-महफ़िल में जिनके आने से रोशन हुए चिराग 
सजदे में जिनके झुक गया खुद देखो आफताब

6-आग सूरज में होती है, तड़पना ज़मीन को पड़ता है 
मोहब्बत निगाहों में होती है, तड़पना दिल को पड़ता है 

7-ख़बर सुन कर मेरे मरने की वो बोले रक़ीबों से
ख़ुदा बख़्शे बहुत सी ख़ूबियां थीं मरने वाले में
-दाग़ देहलवी

उल्टी हो गईं सब तदबीरें

8-उल्टी हो गईं सब तदबीरें कुछ न दवा ने काम किया
देखा इस बीमारी-ए-दिल ने आख़िर काम तमाम किया
-मीर तक़ी मीर

9-दिल के छालों को कोई शायरी कहे तो परवाह नहीं, 
तकलीफ तो तब होती है जब कोई वाह-वाह करता है 
- अज्ञात

10-अपने हिस्से की जिंदगी तो हम जी चुके चुन्नी बाबू 
अब तो सिर्फ धड़कनों का लिहाज करते हैं 
मगर क्या करें इन दुनिया वालों का 
जो आखिरी सांस पर भी ऐतराज करते हैं 

दिल के फफोले जल उठे

11-दिल के फफोले जल उठे सीने के दाग़ से
इस घर को आग लग गई घर के चराग़ से

12-गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं
हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं
- क़तील शिफ़ाई
 

घर से मस्जिद है बहुत दूर

13-घर से मस्जिद है बहुत दूर चलो यूं कर लें
किसी रोते हुए बच्चे को हंसाया जाए
-निदा फ़ाज़ली

14-ऐसा लगा ख़ुदा ने रख दिया हमारे दिल पर हाथ,
लिया नाम हमारा उन्होंने कुछ ऐसी अदा के साथ
-अज्ञात 

15-फिर खो न जाएँ हम कहीं दुनिया की भीड़ में
मिलती है पास आने की मोहलत कभी कभी
-साहिर लुधियानवी 
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