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जिंदगी को दिसम्बर आईना दिखाता है और जनवरी सपने दिखाती है...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  बीते साल को अमरउजाला काव्य के पाठकों ने अपने-अपने शब्दों में कड़वे-मीठे अनुभवों के साथ शेयर किया है। हमनें पाठकों के इन चुनिंदा शेर और कविताओं को अपने मंच में जगह दी है। इनमें से कुछ प्रमुख प्रस्तुति हम आपकी नजर कर रहे हैं।  
 

जिंदगी को दिसम्बर आईना दिखाता है और जनवरी सपने दिखाती है।
-जीतेंद्र प्रसाद
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महीने फिर वही होंगे,सुना है साल बदलेगा..!

महीने फिर वही होंगे,सुना है साल बदलेगा..!
परिंदे फिर वही होंगे,शिकारी जाल बदलेगा...!!
वही हाकिम,वही गुरबत,वही कातिल वही गाजिब..!
न जाने कितने सालों में हमारा हाल बदलेगा...!!
-भास्कर डी साहू



चाहत के वस्ल के उम्मीद-ओ-ऐतबार में
ये साल भी गुज़र गया, तेरे इन्तेज़ार में
-राकेश राज

साल दर साल वक्त निकलता जाता है...

साल दर साल वक्त निकलता जाता है
कमबख्त दिल तो दिल है हर बार संभलता जाता है 
यूं तो बारह महीने फिर तेरी आरजू में कटे
तू वो मौसम है जो हर बार बदलता जाता है
-रोहित कृष्ण नंदन

जिंदगी में बहुत कुछ सिखा डाला इस साल ने
किसी से बिछड़े तो किसी से मिला डाला इस साल ने।।
नई उम्मीदें जागीं कहीं ,कहीं खो गयीं ख्वाहिशें!
मुझे तो क्या से क्या बना डाला इस साल ने ।
-रश्मि कूल 

ये साल रहा जंजीरों का, कुछ लहूलुहान समशीरो का


ये साल रहा जंजीरों का, कुछ लहूलुहान समशीरो का,
इस साल जमीं पर उतरा हूं, इस साल मैं फिर से निखरा हूं।
-नीतेश मिश्रा

कुछ पाने की चाहत,कुछ खोने की मायूसियत में ये साल भी गुजर गया।
कुछ लम्हे सहेज लिये हमने,कुछ वक्त का पैमाना बिखर गया।
कोई पल डूबा तन्हाई में,कोई किसी के साथ से संवर गया।
पल मे रोने,पल में हँसने जैसा हाल रहा
कुल मिला कर सुख दुःख का मेल,ये साल रहा।।
-निधि बंसल

अपने हक के लिए लड़े वो फसाना कब होगा


"अपने हक के लिए लड़े वो फसाना कब होगा
शताब्दी व्यस्क हो रही है जमाना कब होगा"
-प्रतीक कुमार गुप्ता 

गम के अँधेरे से ढूँढा मैंने खुद को 
परछाई से अंजान खुशियों से सारोबार रही
शुक्रिया तुझे ए बीते साल
तेरे जाते जाते खुद से की मुलाकात हुई 
-निधि तिवारी 

कुछ नयी सीख, कुछ नयी बातें, बता गया ये साल! 

कुछ नयी सीख, कुछ नयी बातें, बता गया ये साल! 
थोड़ा हँसाया, थोड़ा हमें रुला गया ये साल!! 
याद रहेंगी, वो सारी बातें हमें! 
जो धीरे-धीरे हमें, समझा गया ये साल!! 
-पीयूष पराशर 

 वक़्त गुज़रा लोग गुजरे राही अब अंजाम पर था
हसीन ख़्वाबों से सजा ,ये दिन भी अपने शाम पर था......
-अंकित त्रिपाठी

अपनेपन में भी परायेपन का अहसास दिलाया उन्होंने

अपनेपन में भी परायेपन का अहसास दिलाया उन्होंने।
ऐ बिछड़ते साल! इस बार तुझे और मुझे, तज़ुर्बा खास दिलाया उन्होंने।।
-कुलदीप निषाद 

जैसा था तुझसे पहले मैं वैसा हूँ तेरे बाद,
है ये भरम तेरा कि मैं बदला हूँ तेरे बाद।
-मेंहदी हुसैन ख़ालिस
 

दिल की सूखी डाली पर, तिनका-तिनका लाया ये साल

दिल की सूखी डाली पर, तिनका-तिनका लाया ये साल
फिर मैंने और इस साल ने मिलकर एक घोंसला बना दिया
खट्टी यादों की नींव, मीठी यादों की छतरी रखकर
मैंने और इस साल ने मिलकर एक आशियाँ बना दिया ।
- प्रतीक महन्त

 "हम फिर टूट कर बिखर गए ए ' ज़िन्दगी 'तेरे एतबार में...
और रफ़्ता-रफ़्ता ये साल गुज़र गया तेरे इन्तज़ार में।।।"
-सुनीता कुमारी

मुझको-"मेरी'"तरह से,बयां कर गया..।

मुझको-"मेरी'"तरह से,बयां कर गया..।
खुद पुराना हो, मुझको नया कर गया..।
-अभिनव शुक्ला 


रफ़्तार में तेरे चलने से , कुछ रूठ गये , कुछ छूट गये । 
रूठों को मनाना बाकी है , रोतों को हंसाना बाकी है ।
-इमरान अनवर 

एक ईट और गिर गयी दीवार-ए-जिंदगी की

एक ईट और गिर गयी दीवार-ए-जिंदगी की , 
नादान है जो कह रहा - नया साल मुबारक हो..
-रवि पाठक

दुरिया हुई नजदिक भी हम आऐ।
हमारे हमसफ़र को हम थोड़ा और जान पाए । प्यार से गुज़रा प्यारा यह सफ़र। चाहतों की चलतीं रहे हर डगर।।
-मंजू गुप्ता
 

कमाल का हौसला दिया रब ने हम इंसानों को 

कमाल का हौसला दिया रब ने हम इंसानों को 
ए दोस्तों.... 
वाक़िफ़ हम अगले पल से नहीं और वादे जन्मों के करते हैं..!!
-सुमित राय 


 वैसे तो रोज होती है रु-ब-रु मुझसे नये नये एहसास में
मगर ऐ ज़िन्दगी ! इस साल को भी गुजार दिया तेरी तलाश में
-जावेद खान

इस साल भी जला दी जिंदगी जैसी जलनी थी

इस साल भी जला दी जिंदगी जैसी जलनी थी,
अब धुंये पर बहस कैसी और राख पर हक कैसा।।
-आकाश दुबे दादा

 साल नया है वक्त भी कुछ नया कर गुजरे मेरे लिए भी इस बार।
उम्मीदो के समंदर मे हमने भी गोते लगाए है इस बार।
-पूनम पवार
 
8 वर्ष पहले
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