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राखी धागों का त्यौहार...पावन पर्व की सुनहरी दास्तां

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  रक्षाबंधन पर हिंदी सिनेमा में कई यादगार फिल्में बनी हैं। इनमें से फिल्म 'राखी' का एक गीत राखी धागों का त्यौहार...काफी भावुक शब्दों के साथ भाई-बहन के इस पावन पर्व की सुनहरी दास्तां व्यक्त करता है। 1962 में रिलीज इस फिल्म में अशोक कुमार और वहीदा रहमान भाई-बहन की भूमिका में हैं।    
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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गीत के बोल काफी मीठे और गहरे हैं...

मोहम्मद रफ़ी की आवाज में राजेंद्र कृष्ण का लिखे इस गीत को संगीत से लयबद्ध रवि ने किया है। बचपन में इस गीत को सुनकर अपनी बहनों के लिए मन श्रद्धा से भर जाता था। राखी के गीतों में यह गीत मुझे सबसे ज्यादा पसंद है। गीत के बोल काफी मीठे और गहरे हैं। रिश्तों की प्रगाढ़ता को शिद्दत से बयां करते हैं।

 

गीत पूरी तरह मुकम्मल भी होता है...

राखी धागों का त्यौहार
बँधा हुआ इक-इक धागे में भाई-बहन का प्यार
राखी धागों का…


गीत धागों के इस त्यौहार की अहमियत समझाने की कोशिश करता है। इस पुरजोर कोशिश में गीत पूरी तरह मुकम्मल भी होता है। गीत के बोल...बंधा हुआ इक इक धागे में भाई-बहन का प्यार...मुझे इससे ता उम्र जोड़े रखेगा।


 

धागे तो कच्चे हैं...

कितना कोमल कितना सुन्दर भाई-बहन का नाता
इस नाते को याद दिलाने ये त्यौहार है आता
बहन के मन की आशाएँ राखी के ये तार
राखी धागों का…


गीत कह रहा है कि भाई-बहन के इस नाते को बताने के लिए ही साल में एक बार यह त्यौहार आता है। भावुक मन कह रहा है कि धागों का हर एक तार बहन के मन की आशाओं में पिरोया हुअा सा है। धागे तो कच्चे हैं पर उससे जुड़ी भावनाएं लोहे से भी ज्यादा मजबूत और सख्त हैं।
 

मन में प्रेम आ जाता है तो फिर

बहन कहे मेरे वीर तुझे ना बुरी नजरिया लागे
मेरे राजा भैय्या तुझको मेरी उमरिया लागे
धन हूँ पराया फिर भी मिलूँगी साल में तो इक बार
राखी धागों का…


जब आप के लिए किसी के मन में प्रेम आ जाता है तो फिर वह मन आपके लिए हमेशा दुआएं करता है। मन आपको कुटिल नजरों से बचाने की कोशिश करता है। बहन का ऐसा पावन मन ही इस त्यौहार की मुख्य धुरी होता है। जिसके चारों और सारी खुशियां झूलती रहती हैं।

मान-सम्मान का ख्याल रखने का वादा करता है...

भाई कहे ओ बहन मैं तेरी लाज का हूँ रखवाला
गूँथूँगा मैं प्यार से तेरे अरमानों की माला
भाई-बहन का प्यार रहेगा जब तक है संसार
राखी धागों का…


भाई अपने पुरुषार्थ से बहन के मान-सम्मान का ख्याल रखने का वादा करता है। पराई बहना भाई का ऐसा आश्वासन पाकर ही खुशी से फूली नहीं समा जाती है। वादों और विश्वास पर टिके राखी के ये महीन धागे बहुत रेशमी होते हैं। ऐसा सिर्फ महसूस कर सकते हैं वो भाई जिनकी कोई बहना नहीं होती है।

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