कुंवर दिनेश की कविताएं और हाइकु सामाजिक चेतना को उजागर करते हैं। कुंवर दिनेश हिमाचल प्रदेश से ताल्लुकात रखते हैं। उन्हें अखिल भारतीय साहित्य सम्मान मिल चुका है। पर्यावरण, सामाजिक विभेद, मोह-माया और प्रेम के साथ अन्य अहम मसलों पर उन्होंने हाइकु लिखे हैं। अकेला पेड़, अपना कोई, मायावी संत, शब्दों की फाट और सिंधु का टोना उनके प्रसिद्ध हाइकु हैं। उनके प्रणय हाइकु में कृष्ण और राधा के अमर बंधन को दर्शाया गया है। जो हम यहां पाठकों के लिए प्रकाशित कर रहे हैं।
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प्रेम में राधा
भावना के बल से –
कृष्ण को बाँधा।
प्यार में डूबा
आनन्द भी,पीड़ा भी
मन अजूबा।
तुम जो मिले
जीवन में फाल्गुन,
सुमन खिले।
प्यार हाथों में हाथ
जिजीविषा बढ़ाता
तुम्हारा साथ।
बांहों में तुम
सारे संशय-भ्रम
हो गये गुम।
छुपाऊँ कैसे
एहसास प्यार का
बताऊँ कैसे।
मिलते कहीं
शहर है छोटी-सा
जगह नहीं।
दर्द का रिश्ता
दिल ढूँढ़े जिसको
आये फ़रिश्ता।
कशमकश
स्मृतियों में छलके
भावकलश।
बोलते नैन
हम दोनों की चुप्पी
तोड़ते नैन।
तन है कहीं
प्यार में पगलाया
मन है कहीं।
प्रेम की माया
साथ रहते नहीं
मानस-काया।
मन उचाट
आँखों-आँखों में अब
रात को काट।
लग जा गले
फिर कोई भी भ्रान्ति
जी को न छले।
चुप्प न रहो
प्रेम का नियम है-
कुछ तो कहो।
कुछ भी बोलो
प्रेम का नियम है
मन से बोलो।
दिल की कही
लगे बिल्कुल सही
प्यार है यही।
जन्मों का नाता
दूर-दूर दिलों को
पास ले आता।
बैठे हैं यूँ ही,
प्यार हुआ जब से,
ऐठें हैं यूँ ही
लगती पूरी
गागर ये प्रेम की
फिर अधूरी।