मुश्किल घड़ियां सभी के जीवन में किसी न किसी रूप में मौज़ूद रहती हैं। कहते हैं बुरे हालात में अपना साया भी साथ छोड़ देता है लेकिन ऐसे ही वक़्त में इंसान के हौंसले और आत्मविश्वास की परीक्षा भी होती है। शेरो-शायरी और कविताओं में इतनी ताक़त तो होती है कि हर आदमी अपनी मुश्किलों में कुछ प्रेरणादायक पंच, कविता, शायरी की खोज करता है। पेश है प्रेरणा देने वाले शेर...
बारे दुनिया में रहो ग़म-ज़दा या शाद रहो
ऐसा कुछ कर के चलो याँ कि बहुत याद रहो
-मीर तक़ी मीर
कुछ ऐसे सिलसिले भी चले ज़िंदगी के साथ
कड़ियां मिलीं जो उनकी तो ज़ंजीर बन गए
- यूसुफ़ बहजाद
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कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
-बेदम शाह वारसी
मुझको उस वैद्य की विद्या पे तरस आता है
भूखे लोगों को जो सेहत की दवा देता है
- नीरज
साहिल के सुकूँ से किसे इंकार है लेकिन
तूफ़ान से लड़ने में मज़ा और ही कुछ है
- आल-ए-अहमद सूरूर
उसे गुमाँ है कि मेरी उड़ान कुछ कम है
मुझे यक़ीं है कि ये आसमान कुछ कम है
- नफ़स अम्बालवी
प्यासो रहो न दश्त में बारिश के मुंतज़िर
मारो ज़मीं पे पाँव कि पानी निकल पड़े
- इक़बाल साजिद
तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल
हार जाने का हौसला है मुझे
- अहमद फ़राज़
सफ़र में अब के अजब तजरबा निकल आया
भटक गया तो नया रास्ता निकल आया
- राजेश रेड्डी
और मौसम, इरादा तब्दील कर लेते हैं
आगे बढ़ने वालों से पनाह माँगते हैं
- अबरार अहमद