विज्ञापन

मालिनी अवस्थी की आवाज़ में ये गीत करवाएंगे भारतीय-लोक की सैर

काव्य डेस्क

Kavya Charcha Shakhsiyat
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  

पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित लोक-गायिका मालिनी अवस्थी अवधी, बुंदेली और भोजपुरी में गाती हैं साथ ही वह ठुमरी और कजरी भी अपनी मधुर आवाज़ में गाती हैं। प्रस्तुत है उनकी आवाज़ की झलक इन गीतों के साथ, सुनिए भारत के लोकगीतों की सुंदरता 

रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे
रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे 

जौन टिकसवा से बलम मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें
पानी बरसे टिकस गल जाए रे, रेलिया बैरन 



जौने सहरिया को बलमा मोरे जैहें, रे सजना मोरे जैहें
आगी लागै सहर जल जाए रे, रेलिया बैरन 

जौन सहबवा के सैंया मोरे नौकर, रे बलमा मोरे नौकर
गोली दागै घायल कर जाए रे, रेलिया बैरन 

जौन सवतिया पे बलमा मोरे रीझे, रे सजना मोरे रीझें
खाए धतूरा सवत बौराए रे, रेलिया बैरन 

विज्ञापन

मालिनी अवस्थी

मालिनी अवस्थी का जन्म उत्तर-प्रदेश के कन्नौज में हुआ है और वह बनारस घराने से तआल्लुकात रखने वाली पद्म विभूषण गायिका गिरिजा देवी की शिष्या हैं। 

मालिनी अवस्थी की कजरी

जितनी लोकप्रिय उनकी गायी हुई ठुमरी हैं उतनी ही प्रसिद्ध कजरी भी हैं। यहां सुनिए उनकी एक कजरी 

जब मालिनी ने गाया 'रेशम का रूमाल गले में डाल के'

जगजीत सिंह और गुलाम अली के सामने मालिनी अवस्थी का दादरा गीत

मालिनी अवस्थी का बन्ना-बन्नी गीत

7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all