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मतदान का आख़िरी चरण - कविताओं के ज़रिए पाठकों ने किया जागरुक

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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देश में आम चुनावों का दौर चल रहा है और अगले 5 साल तक के लिए देश का मुस्तक़बिल तय होगा। कल आख़िरी चरण का मतदान होगा और एक-एक वोट बहुत क़ीमती है। क्यूंकि इसी से आपकी सरकार तय होगी और भविष्य भी। इसी बात को 'काव्य' के पाठकों ने कविता के माध्यम से यूं कहा है।  

करो मतदान, बनो महान,
राष्ट्र की सेवा में, राष्ट्र हित में क़दम बढ़ाओ,
लोकतंत्र की ताक़त की करो पहचान,
करो मतदान, बनो महान।
सेना तो रोज़ करती है सेवा देश की,
आप भी राष्ट्रसेवक बन जाओ,
धूप गर्मी का भय छोड़कर
अपना अपना मतदान कर आओ।
पाँच वर्षों में आता है ये पावन पर्व,
करो अपने संविधान पे गर्व,
जो ये शक्ति हमको देती है,
एक एक वोट को सहेजकरॉ
देश को सशक्त नेतृत्व देती है।
निकलों घरों से करो मतदान,
ना करो लोकतंत्र का अपमान,
सौ फ़ीसदी वोट करो,
अपने हक़ के लिए लड़ो, उठो,
चलो और मतदान करो।

- सुरेन्द्र कुमार गुप्ता

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राष्ट्रहित में मतदान करें

संविधान से शक्ति लेकर
आओ अमृतपान करें
चलो सभी मतदान करें

महाशक्ति हो देश हमारा
उसी के हित में वोट करें
अपनी ऊँगली की ताकत से
देशद्रोह पर चोट करें 
छोटे-मोटे स्वार्थ साधने
निष्ठा हटा नहीं सकते
भरतभूमि के संविधान की
गरिमा घटा नहीं सकते
लहराए निज ध्वजा गगन में
ऐसा अनुसंधान करें
चलो सभी मतदान करें 

- नवीन जोशी ‘नवल’

मतदान का महत्व

देश को गर बचाना है तो
मतदान केन्द्र जाना है 
कर आंकलन मूल्यों का
फिर योग्य को जितवाना है 
हां योग्य को जितवाना है 

कौन लाईनों में खड़ा रहेगा
होगा समय बर्बाद हमारा
यही सोच अपनाये रखी तो
होगा उसमें अहित तुम्हारा 

अयोग्य उम्मीदवार जीतकर
तुम पर हुक्म चलाएगा
नये नये फरमानों को नित
तुमसे ही मनवायेगा

पांच साल तक फिर तुम
अपनी भूल पर पछताओगे 
पांच साल बाद फिर तुम
मत देने जरूर जाओगे

- रीना देवी

मतदान की पैरोडी

आओ वोटर तुम्हें बताएं ताकत हम मतदान की।
एक वोट से सत्ता बदलती, अपने हिंदुस्तान की

वन्देमातरम वन्देमातरम
वन्देमातरम वन्देमातरम

वोटों की ताकत को समझों, जनता सबपर भारी है।
बिन लालच के वोट डालना, सबकी जिम्मेदारी है।
ज्यादा से ज्यादा वोटिंग हो, कोशिश यही हमारी है।
वोट डालने जाना सबको, चाहे नर या नारी है।

- लोमेश कुमार गौर

मतदान कर

लोकतंत्र का विशाल मेला है
मतदाता नहीं अब अकेला है
चाहे सूरज आग सा तपता है
पर कुछ फर्क नहीं पड़ता हैं
देश की बागडोर का सवाल है
और चुनाव कहाँ हर साल है
चाहे हो औरत, वृद्ध , या जवान
उँगली पर स्याही का हो निशान
जरा निकल घर से मतदान कर
इस अधिकार पर अभिमान कर
भविष्य का गौरव तुम्हें बुनना है
हर प्रत्याशी तुम्हीं को चुनना है
चाहे कतार में खड़ा मतदाता तू
पर है भारत भाग्य विधाता तू

- दीपक नारंग 

7 वर्ष पहले
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