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लाला माधव राम जौहर के चुनिंदा शेर

दीपाली अग्रवाल

Kavya Charcha
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तुझ सा कोई जहान में नाज़ुक-बदन कहां
ये पंखुड़ी से होंट ये गुल सा बदन कहां

थमे आंसू तो फिर तुम शौक़ से घर को चले जाना
कहां जाते हो इस तूफ़ान में पानी ज़रा ठहरे

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जो दोस्त हैं वो मांगते हैं सुल्ह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो

समझा लिया फ़रेब से मुझ को तो आप ने
दिल से तो पूछ लीजिए क्यूं बे-क़रार है

आ गया 'जौहर' अजब उल्टा ज़माना क्या कहें
दोस्त वो करते हैं बातें जो अदू करते नहीं

मोहब्बत को छुपाए लाख कोई छुप नहीं सकती
ये वो अफ़्साना है जो बे-कहे मशहूर होता है

दुनिया बहुत ख़राब है जा-ए-गुज़र नहीं
बिस्तर उठाओ रहने के क़ाबिल ये घर नहीं

कटते किसी तरह से नहीं हाए क्या करूं
दिन हो गए पहाड़ मुझे इंतिज़ार के

दिल में आओ मज़े हों जीने के
खोल दूं मैं किवाड़ सीने के

हो न दुश्मन को मोहब्बत से सरोकार कभी
कोई दुनिया में किसी को न करे प्यार कभी

6 वर्ष पहले
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Anil Pandey

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