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महिला दिवस विशेष: औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना, उस शख़्स को...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha Shakti
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                                                  पुरुष-प्रधान मान्यताओं को बीते कई दशकों से महिलाओं ने चुनौती देते हुए हर क्षेत्र में स्वयं को स्थापित किया है। कई उदाहरण ऐसे भी देखने को मिलते हैं जहाँ पुरुषों ने भी महिला विरोधी रूढ़ियों का विरोध किया और उनके समान अधिकारों की बात की। यहाँ कुछ ऐसे ही शेर मौजूद हैं जिनमें महिलाओं ने तो अपने हक़ों की आवाज़ उठाई ही है साथ ही पुरुषों ने भी उनके महत्व को समझाया है। 

औरत को समझता था जो मर्दों का खिलौना 
उस शख़्स को दामाद भी वैसा ही मिला है 
- तनवीर सिप्रा

ये औरतों में तवाइफ़ तो ढूँड लेती हैं 
तवाइफ़ों में इन्हें औरतें नहीं मिलतीं 
- मीना नक़वी

औरत अपना आप बचाए तब भी मुजरिम होती है 
औरत अपना आप गँवाए तब भी मुजरिम होती है 
- नीलमा नाहीद दुर्रानी
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औरत हो तुम तो तुम पे मुनासिब है चुप रहो 
ये बोल ख़ानदान की इज़्ज़त पे हर्फ़ है 
- सय्यदा अरशिया हक़

दुआ को हात उठाते हुए लरज़ता हूँ 
कभी दुआ नहीं माँगी थी माँ के होते हुए 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़

एक औरत से वफ़ा करने का ये तोहफ़ा मिला 
जाने कितनी औरतों की बद-दुआएँ साथ हैं 
- बशीर बद्र

कौन बदन से आगे देखे औरत को 
सब की आँखें गिरवी हैं इस नगरी में 
- हमीदा शाहीन

अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता 
वो देखो एक औरत आ रही है 
-शकील जमाली

तलाक़ दे तो रहे हो इताब-ओ-क़हर के साथ 
मिरा शबाब भी लौटा दो मेरी महर के साथ 
- साजिद सजनी

एक मुद्दत से मिरी माँ नहीं सोई 'ताबिश' 
मैं ने इक बार कहा था मुझे डर लगता है 
- अब्बास ताबिश

बेटियाँ बाप की आँखों में छुपे ख़्वाब को पहचानती हैं 
और कोई दूसरा इस ख़्वाब को पढ़ ले तो बुरा मानती हैं 
- इफ़्तिख़ार आरिफ़

औरत के ख़ुदा दो हैं हक़ीक़ी ओ मजाज़ी 
पर उस के लिए कोई भी अच्छा नहीं होता 
- ज़ेहरा निगाह

अभी रौशन हुआ जाता है रस्ता 
वो देखो एक औरत आ रही है 
- शकील जमाली

अच्छी-ख़ासी रुस्वाई का सबब होती है 
दूसरी औरत पहली जैसी कब होती है 
- फ़े सीन एजाज़

उसे हम पर तो देते हैं मगर उड़ने नहीं देते 
हमारी बेटी बुलबुल है मगर पिंजरे में रहती है 
- रहमान मुसव्विर

जवान गेहूँ के खेतों को देख कर रो दें 
वो लड़कियाँ कि जिन्हें भूल बैठीं माएँ भी 
- किश्वर नाहीद

जिस को तुम कहते हो ख़ुश-बख़्त सदा है मज़लूम 
जीना हर दौर में औरत का ख़ता है लोगो 
- रज़िया फ़सीह अहमद
5 वर्ष पहले
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