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जनवरी के महीने और नए साल पर शायराना अल्फ़ाज़...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  सोलहवें ज़ीने पे सूरज था 'उबैद'
जनवरी की इक सलोनी शाम थी
- एजाज़ उबैद

यकुम जनवरी है नया साल है
दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
- अमीर क़ज़लबाश
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जनवरी का महीना जो आ कर गया
फिर नए साल की इब्तिदाई कर गया
- हैदर बयाबानी

दीवारों पर नए कैलेंडर नए मनाज़िर होंगे
दौड़ी दौड़ी आई जनवरी बॉय दिसम्बर बाबा
- अब्दुर्रहीम नश्तर

ऐ जाते बरस तुझ को सौंपा ख़ुदा को 
मुबारक मुबारक नया साल सब को 
-मोहम्मद असदुल्लाह

न शब ओ रोज़ ही बदले हैं न हाल अच्छा है 
किस बरहमन ने कहा था कि ये साल अच्छा है 
-अहमद फ़राज़

सफ़र का एक नया सिलसिला बनाना है 
अब आसमान तलक रास्ता बनाना है 
- शहबाज़ ख़्वाजा

नए साल में पिछली नफ़रत भुला दें 
चलो अपनी दुनिया को जन्नत बना दें 
- अज्ञात

फिर आ गया है एक नया साल दोस्तो 
इस बार भी किसी से दिसम्बर नहीं रुका 
- अज्ञात

मुबारक मुबारक नया साल आया 
ख़ुशी का समाँ सारी दुनिया पे छाया 
- अख़्तर शीरानी
6 वर्ष पहले
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