विज्ञापन

एहसास-ए-ज़िंदगी पर ये हैं 20 चुनिंदा शेर... 

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  एहसास यानि आपकी अनुभूतियां। अनुभूतियां जब शब्दों के साथ लय और तुक में ढलने लग जाती हैं तो वे हमारे सामने शायरी या कविता के रूप में दिखाई-सुनाई पड़ती हैं। क्योंकि शायर या कवि अपनी कल्पनाशक्ति और भाषिक योग्यता के बल पर जीवन के कई ओर-छोर को लयात्मकता में ढालता है। पेश है एहसास-ए-ज़िंदगी पर 20 चुनिंदा शेर... 

निगाहों में चमक दिल में ख़ुशी महसूस करता हूँ 
कि तेरे बस में अपनी ज़िंदगी महसूस करता हूँ 
-क़तील शिफ़ाई

जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर,
तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ
-अज्ञात
विज्ञापन

सब अपने आईने उसने मुझी को सौंप दिए
उसे शिकस्त का एहसास था बहुत गहरा
- फ़ज़ा इब्न-ए-फ़ैज़ी

अपनी हालत का ख़ुद एहसास नहीं है मुझ को 
मैं ने औरों से सुना है कि परेशान हूँ मैं 
- आसी उल्दनी

मुझ को एहसास है लेकिन तुझे एहसास नहीं
तेरे दामन की हवा मेरे लिए रास नहीं
- नरेश कुमार शाद

इसी कमी का है एहसास और हैरानी
हैं और तो सभी मौजूद हम किधर गए हैं
- ज़फ़र इक़बाल

मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए 
कि ज़िंदगानी इबारत है तेरे जीने से 
- ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मिले जब तुम तो ये एहसास जागा
अब आगे का सफ़र तन्हा नहीं है
- अब्दुल्लाह जावेद

ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है
रहे सामने और दिखाई न दे
- बशीर बद्र

मेरी बहकी हुई बातों का बुरा मत मानो
मेरे एहसास को तहज़ीब कुचल देती है
- अख़्तर पयामी

मेरे एहसास में कोहराम मचा है लेकिन
कोई आवाज़ सुनाई नहीं देती मुझ को
- क़तील शिफ़ाई

मेरे एहसास पे भी बर्फ़ जमी है जैसे
आँच देता नहीं जज़्बात को कोई मौसम
- शाहिद अख़्तर

अपने एहसास की तहरीक पे शरमाती हुई
अपने क़दमों की भी आवाज़ से कतराती हुई
- वसीम बरेलवी

इतनी तन्हाई का एहसास मुसलसल हो अगर
अपने साए से भी डर जाता है इंसाँ जानाँ
- अमानुल्लाह ख़ालिद

पहले भी कभी नूर का एहसास हुआ था
या आज ही इस ग़म से ख़बर-दार हुए हो
- शहज़ाद अहमद

इतना सन्नाटा कि एहसास का दम घुटता है
सुब्ह का ज़िक्र करो शाम की कुछ बात करो
- अरशद सिद्दीक़ी

एक हल्की सी चुभन एहसास को घेरे रही
गुफ़्तुगू में जब तुम्हारा ज़िक्र आया इस तरफ़
- नोशी गिलानी

इक उम्र से रोया हूँ न तड़पा हूँ में 'शहज़ाद'
एहसास का बादल कभी बरसा है न गरजा
- शहज़ाद अहमद

कौन था जो मिरे एहसास को रौशन करता
उम्र भर सिर्फ़ मिरा दिल ही जला है मुझ में
- मसूदा हयात

वो रफ़्ता रफ़्ता ज़िंदगी से दूर क्या हुए
एहसास ज़िंदगी का भी मरता चला गया
- शौक़ मुरादाबादी
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

dinesh chauhan

3544 कविताएं

View Profile

Manoj Kumar

420 कविताएं

View Profile