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'दीपावली' पर ये हैं 20 चुनिंदा शेर....

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  दीपावली उम्मीद का उत्सव है। सबके जीवन में उजाले की उम्मीद। ऐसा शायद ही कोई शायर होगा जिसने चराग़-या रौशनी पर दो-चार शेर न कहें हों। पेश है दिवाली पर शायरों के कलाम- 

हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई
जैसे कि दिवाली हो कि दिया जलता जाए बुझता जाए
- नुशूर वाहिदी

चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है 
अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है 
- फ़रहत एहसास
 
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जो सुनते हैं कि तिरे शहर में दसहरा है
हम अपने घर में दिवाली सजाने लगते हैं
- जमुना प्रसाद राही

वो उजाला है हम उजाले को
दिल-ए-तारीक में छुपा लेंगे
- अशरफ़ नक़वी

अजब बहार का है दिन बना दिवाली का
जहाँ में यारों अजब तरह का है ये त्यौहार
- नज़ीर अकबराबादी

सुना ये तू ने नहीं माजरा दिवाली का
जहाँ में ये जो दीवाली की सैर होती है
- नज़ीर अकबराबादी

जैसे दीवाली की शब हल्की हवा के सामने
गाँव की नीची मुंडेरों पर चराग़ों की क़तार
- एहसान दानिश

खिड़कियों से झाँकती है रौशनी
बत्तियाँ जलती हैं घर घर रात में
- मोहम्मद अल्वी

नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही 
ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे 
- बशीर बद्र

कई इतिहास को एक साथ दोहराती है दीवाली
मोहब्बत पर विजय के फूल बरसाती है दीवाली
- नज़ीर बनारसी

घर की मुंडेरों तक बरपा है दीवाली का सारा जश्न
कैसे हो अंदर भी चराग़ाँ मैं भी सोचूँ तू भी सोच
- असरारुल हक़ असरार

दिवाली ईद में अक्सर खिलौने बेचता है अब
ये वो बच्चा है जिस ने अपनी ख़्वाहिश को दबा रक्खा
- संजीव आर्या

बीस बरस से इक तारे पर मन की जोत जगाता हूँ
दीवाली की रात को तू भी कोई दिया जलाया कर
- माजिद-अल-बाक़री

निगाहों का मुक़द्दर आ के चमकाती है दीवाली
पहन कर दीप-माला नाज़ फ़रमाती है दीवाली
- नज़ीर बनारसी

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में
हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में
- नज़ीर बनारसी

दीप जलते हैं दिलों में कि चिता जलती है
अब की दीवाली में देखेंगे कि क्या होता है
- मख़दूम मुहिउद्दीन

घुट गया अँधेरे का आज दम अकेले में
हर नज़र टहलती है रौशनी के मेले में
- नज़ीर बनारसी

अभी तो जाग रहे हैं चराग़ राहों के 
अभी है दूर सहर थोड़ी दूर साथ चलो 
- अहमद फ़राज़

अगरचे ज़ोर हवाओं ने डाल रक्खा है 
मगर चराग़ ने लौ को संभाल रक्खा है 
- अहमद फ़राज़

घर से बाहर नहीं निकला जाता 
रौशनी याद दिलाती है तिरी 
- फ़ुज़ैल जाफ़री

तीरगी का दश्त नापा रौशनी के वास्ते
रौशनी फैली तो मुझ को रौशनी चुभने लगी
- सौरभ शेखर

हर तरफ़ रौशनियाँ रौशनियाँ रौशनियाँ
ज़िंदगी पहले कभी ऐसी दिल-आवेज़ न थी
- ज़ाहिद डार

चारों तरफ होगा ख़ुशियों का नज़ारा
सजेगा हर आंगन दीपक का उजाला
-अज्ञात 
7 वर्ष पहले
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