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वो गाने, जो अश्लील बोलों की वजह से विवादों में रहे

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  हिंदी फ़िल्में बिना गानों के मुकम्मल नहीं होतीं। फ़िल्म रिलीज़ होने के पहले गानों का चर्चाओं में आ जाना और गानों से ही फ़िल्म के बारे में बातें शुरू हो जाना एक स्वाभाविक प्रक्रिया रही है। किसी फ़िल्म की रिलीज़ के पहले गाने ही फ़िल्म को लेकर एक माहौल तैयार करने का काम करते हैं। ऐसा हिंदी सिनेमा के लगभग हर दौर में रहा है। 60 और 70 के दशक में ऐसी फ़िल्मों की भरमार रही है जो अपने गानों की वजह से हिट रहीं।

एक दौर में शम्मी कपूर और राजेश खन्ना की फ़िल्मों में कम से कम सात-आठ गाने हुआ करते थे। ऐसी फ़िल्मों को म्यूज़िकल ‌हिट फ़िल्मों की उपमा दी जाती थी। तो गाने फ़िल्म को ‌हिट कराने और उसे चर्चा में लाने का एक जरिया बने। लेकिन बाद में यही कोशिश एक अलग दिशा में चल पड़ी। फ़िल्मों के गानों में ऐसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया जो सुनने में तो फूहड़ लगते थे ही उनका फिल्मांकन भी उतना ही भद्दा हुआ करता था।

ऐसे लिखे गए और फ़िल्माए गए गीतों को देखकर आसानी से समझा जा सकता है कि गाने के बोल और फ़िल्मांकन दर्शक को किस दिशा में सोचने के लिए मजबूर कर रहे हैं। एक निगाह डालते हैं ऐसे ही गानों पर जो कॉन्ट्रोवर्सी, डबल मीनिंग और अश्लीलता परोसने के आरोपों की वजह से चर्चा में रहे।
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'खलनायक' का विवादित गाना

चोली के पीछे क्या है...? 

1993 की सुपर हिट फ़िल्म खलनायक वैसे कई वजहों से चर्चा और विवादों में रही। इनमें एक विवाद फ़िल्म के गाने "चोली के पीछे क्या है, चुनरी के नीचे क्या है" को लेकर भी हुआ। माधुरी दीक्षित पर फ़िल्माए गए इस गाने पर अश्लीलता को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगे। गाने को लिखा था गीतकार आनंद बक्षी ने और गाया था इला अरुण और अलका याज्ञनिक ने। हालांकि बाद में बाल ठाकरे के दख़्ल के बाद मामला शांत हो गया। उन्होंने यह कहकर फ़िल्म निर्माताओं को राहत दी थी कि "चोली के पीछे क्या है, चुनरी के नीचे क्या है गाने में कुछ भी ग़लत नहीं है"। यह गाना आज भी विवादित गानों की लिस्ट में शामिल है।यह गाना आज भी सुना जाता है...

सलमान और शाहरुख़ की फ़िल्म का यह गाना चर्चा में आया

'राणा जी माफ़ करना...'

1995 में रिलीज हुई फ़िल्म करन अर्जुन में सलमान ख़ान और शाहरुख़ ख़ान मुख्य भूमिका में थे। इस फ़िल्म का मशहूर गाना 'गुप चुप गुप चुप गुप' अपने द्विअर्थी बोलों की वजह से काफ़ी चर्चा में रहा था। यह गीत लिखा था इंदीवर ने। इसके बोल थे, "छत पे सोया था बहनोई, मैं तने समझ के सो गयी, मुझको राणा जी माफ करना ग़लती म्हारे से हो गई"  यह गाना ममता कुलकर्णी पर फ़िल्माया गया था। इस पूरे गाने में ममता अपने बहनोई के साथ बिताई रात को बयान करती हैं।इसके म्यूज़िक डायरेक्टर थे राजेश रौशन और गायिका थीं अलका याज्ञनिक और इला अरुण।

इस गाने पर लगे अश्लीलता परोसने के आरोप

गुटुर गुटुर...

90 के दशक की दलाल फ़िल्म में एक गाना था जिस पर अश्लीलता परोसने के आरोप लगे। यह गाना था मिथुन चक्रबर्ती और आयशा जुल्का पर फ़िल्माया गया 'गुटुर गुटुर'। माया गोविंद के लिखे इस गीत के बोल थे, चढ़ गया ऊपर रे, अटरिया पे लोटन कबूतर रे, पंछी दीवाना चुग कर दाना, उड़ गया फर-फर रे। इस गाने को गाया था अलका याज्ञनिक, बप्पी लाहिरी, इला अरुण और कुमार सानू ने ।

ए आर रहमान ने दिया ऐसे गाने का संगीत...

रुक्मणी रुक्मणी...

निर्देशक म‌णि रत्नम की 1992 में आई रोजा एक गंभीर विषय पर बनी फ़िल्म थी। इसमें ए आर रहमान ने संगीत दिया था। हालांकि, इसका एक गाना 'रुक्मणी रुक्मणी' जिस को लेकर आपत्ति की गई थी। पीके मिश्रा ने इस गीत के बोल लिखे थे। बोल कुछ यूं थे, 'रुक्मणी रुक्मणी शादी के बाद क्या हुआ? खटिया पे धीरे धीरे खट खट होने लगी, आगे पीछे हुआ तो छट पट होने लगी।' इस गाने को गाया था गायिका श्वेता शेट्टी ने। 

गुलज़ार का यह फेमस और विवादित गाना

फिल्म का गाना विवादों में रहा

रिंग रिंग रिंगा...

भारत की पृष्ठभूमि पर 2008 की स्लमडॉग मिलेनियर ऑस्कर अवॉर्ड से नवाज़े जाने की वजह से काफ़ी चर्चा में रही। लेकिन इसका गाना "रिंग रिंग रिंगा" विवादों के घेरे में रहा था। गुलज़ार के लिखे इस गीत की काफ़ी आलोचना हुई थी। गीत के बोल हैं-खटिया पे मैं पड़ी थी और गहरी नींद बड़ी थी, एक खटमल था सयाना, मुझपे था उसका निशाना, चुनरी में घुस गया धीरे धीरे। अलका याज्ञनिक और इला अरुण ने यह गाना गया था।

   

इस फ़िल्म के गाने ने लोगों को चौंका दिया

भाग डीके बोस...

2011 में आई डेल्ही बेली युवाओं को केंद्र में रखकर बनी फ़िल्मों से हटकर थी। इसमें न सिर्फ फ़िल्म के संवादों को लेकर विवाद हुआ बल्कि एक गाने ने तो लोगों को चौंका ही दिया। अमिताभ भट्टाचार्य का लिखा भाग डीके बोस...डीके बोस को लेकर विवाद गर्मा गया था। गाने के बोल थे, डैडी मुझसे बोला, तू ग़लती है मेरी, तुझपे जिंदगानी गिल्टी है मेरी, साबुन की शक्ल में, बेटा तू तो निकला केवल झाग...भाग डीके बोस...डीके बोस। अगर इसे ग़ौर से सुनें तो इसके बोल आपत्तिजनक लगते हैं। राम संपत इस गाने के कम्पोज़र और गायक थे।
 

चित्रांगदा के इस आइटम सॉन्ग पर लोगों ने की आपत्ति

कुंडी मत खड़काओ राजा...

अक्षय कुमार अभिनीत गब्बर इज़ बैक फिल्म का आइटम सॉन्ग चर्चा में रहा था।हालांकि, चित्रांगदा सिंह पर फ़िल्माया गया यह आइटम सॉन्ग काफ़ी पॉपुलर रहा। इसके बोल डबल मीनिंग थे जिसे लेकर आपत्ति की गई थी। बोल कुछ यूं थे, कुंडी मत खड़काओ राजा, सीधा अंदर आओ राजा, फूल बिछा परफ्यूम लगा के, मुझे बनाओ ताजा ताजा। फ़िल्म के लिए दर्शकों को सिनेमा घर तक खींचने में भी कामयाब रहा। नेहा कक्कड़ ने इन गाने को अपनी आवाज़ दी है । गाने में यो यो हनी सिंह का रैप है।

सनी लियॉनी पर फ़िल्माया गया यह विवादित आइटम नंबर..

'लैला तेरी ले लेगी'

शूट आउट एट वडाला फ़िल्म में सनी लियोनी पर फ़िल्माए गए आइटम नंबर 'लैला तेरी ले लेगी' के रिलीज़ होती ही कंट्रोवर्सी खड़ी हो गई थी। हालांकि, जब तक इसको लेकर आपत्ति दर्ज की जाती तब तक यह काफी पॉपुलर हो गया। इस आइटम नंबर के बोल थे, लैला तेरी ले लेगी, तू लिख के ले ले...। पर इन बोलों को सेंसर बोर्ड की आपत्ति के बाद निर्माताओं ने बदल कर 'लैला तुझे लूट लेगी' कर दिया था। संजय गुप्ता और आनंद राज आनंद ने इस आइटम नंबर को लिखा था।

'आर रे प्रीतम प्यारे' रहा ख़ासा चर्चा में....

आर रे प्रीतम प्यारे

अक्षय कुमार की हिट फ़िल्म राउडी राठौड़ का आइटम नंबर 'आ रे प्रीतम प्यारे' भी ख़ासा चर्चा में रहा था। इसके बोल थे, सब आग तो मेरे कुर्ती में रे, ज़रा हुक्का उठा, ज़रा चिल्लम जला, पल्लू के नीचे छुपा के रखा है, उठा दूं तो हंगामा हो...हो। इन्हीं बोलों को लेकर विवाद हुआ था। ये बोल लिखे थे, समीर और फैज़ अनवर ने और संगीत दिया था साजिद-वादिज ने।

करीना के 'हलकट जवानी' गाना ने किया लोगों को चकित

हलकट जवानी...

मधुर भंडारकर की बहुचर्चित फ़िल्म रही 'हिरोइन' में करीना कपूर पर फ़िल्माए गए 'हलकट जवानी' गाने ने भी लोगों को चकित कर दिया था। इस गाने में करीना स्टेज पर नाचते हुए नज़र आती हैं। इस गाने के बोल थे, नाइट की नॉटी कहानी, ये हलकट जवानी, आंखों को क्यूं सेके, हाथों से कर मनमानी। गाने के बोल लिखे थे अमिताभ भट्टाचार्य ने और गाया था सुनिधि चौहान ने।
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