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भरोसे पर 10 चुनिंदा शेर...

रत्नेश मिश्र

Kavya Charcha
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                                                  भरोसा ऐसा शब्द है जिसके बिना जीवन में एक कदम भी आगे बढ़ पाना मुस्किल है लेकिन यह भी सच है धोखे जैसे शब्द भी भरोसे के साथ ही यात्रा करते हैं। जहां विश्वास है वहीं अविश्वास भी होता है। शायरों ने बड़ी बारीकी से ऐसे आहसासों में लफ़्ज भरे हैं। पेश है भरोसे पर शायरों के अल्फ़ाज़- 

ग़ज़ब किया तिरे वअ'दे पे ए'तिबार किया 
तमाम रात क़यामत का इंतिज़ार किया 
~दाग़ देहलवी

जब अपना दिल ख़ुद ले डूबे औरों पे सहारा कौन करे
कश्ती पे भरोसा जब न रहा तिनकों पे भरोसा कौन करे
~आनंद नारायण मुल्ला
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
~अहमद फ़राज़

या तेरे अलावा भी किसी शय की तलब है
या अपनी मोहब्बत पे भरोसा नहीं हम को
~शहरयार

आदतन तुम ने कर दिए वादे 
आदतन हम ने ए'तिबार किया 
~गुलज़ार

ऐ मुझ को फ़रेब देने वाले 
मैं तुझ पे यक़ीन कर चुका हूँ 
~अतहर नफ़ीस

झूट पर उस के भरोसा कर लिया 
धूप इतनी थी कि साया कर लिया 
~शारिक़ कैफ़ी

तुम सितारों के भरोसे पे न बैठे रहना
अपनी तदबीर से तक़दीर बनाते जाओ
~सदा अम्बालवी

भोली बातों पे तेरी दिल को यक़ीं 
पहले आता था अब नहीं आता 
~आरज़ू लखनवी

मिरी ज़बान के मौसम बदलते रहते हैं 
मैं आदमी हूँ मिरा ए'तिबार मत करना 
~आसिम वास्ती
7 years ago
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