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प्रयोगवाद, नई कविता और भारत भूषण अग्रवाल की ये 3 चुनिंदा कविताएं...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  प्रयोगवाद व नई कविता की काव्यधारा में भारत भूषण अग्रवाल का नाम प्रमुख है। आत्मविश्वास और काव्य शिल्प की निराली भंगिमा के कारण अपना विशिष्ट है। जीवन के प्रति अशेष प्रेम, लालसा, अपनी अटूट विश्वसनीयता के कारण भारत भूषण का काव्य जन-जन में स्पंदन उत्पन्न करने में समर्थ है-

इसलिए मौन हो जाता हूँ, स्वीकार करो यह विदा 
आज आख़िरी बार;
मत समझो मेरी नीरवता को व्यथा-जात 
या मेरा निज पर अनाचार।

मैं आज बिछुड़ कर भी सचमुच सुखी हुआ मेरी रानी!
इतना विश्वास करो मुझ पर
मैं सुखी हूँ कि तुमने अपनी नारी-जन सुलभ चातुरी से
बिखरा दी मेरी नादानी
पानी-पानी करके सत्वर

मैं सुखी हूँ कि इस विदा-समय भी नहीं नयन गीले तेरे,
मैं सुखी हूँ कि तुमने न बँटाए कभी अलभ्य स्वप्न मेरे,
मैं सुखी हूँ कि कर सकीं मुझे तुम निर्वासित यों अनायास, 
मैं सुखी हूँ कि मेरा प्रमाद बन सका नहीं तेरा विलास।
मैं सुखी हूँ कि - पर रहने दो, तुम बस इतना ही जानो
मैं हूँ आज सुखी,
अन्तिम बिछोह, दो विदा आज आख़िरी बार ओ इन्दुमुखी !
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मुश्किल यह है

मुश्किल यह है कि मैं
ज़िंदगी को एक इमारत की तरह गढ़ना चाहता था
एक नक्शे के अनुसार
और क्योंकि नक्शा
हर कलैण्डर के साथ बदलता गया
इसलिए हर बार अधबनी इमारत में
तोड़फोड़ करनी पड़ी

ये मुलाक़ातें

ये मुलाक़ातें-
बीच-बीच की 
ये मुलाक़ातें
मेरी उम्र के पन्नों पर ऐसे ही सजी हैं
जैसे बच्चे अपनी पोथी में
चमकीली पन्नी
साँप की केंचुल
और फूल की पँखुरियाँ रखते हैं ।
प्यार ?
सच क्या वह ललक ही प्यार है ?
तो फिर उसको क्या कहते हैं
जो अनजाने अँधेरे में
भीतरी तहों में पहुँच जाता है
और हरेक छिद्र को रस में भर देता है ।
इस बार मिलोगी तो पूछूँगा !
7 वर्ष पहले
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