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दोस्ती पर ये हैं 20 बड़े शेर...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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दुनिया में कुछ रिश्ते ऐसे हैं जो हमें ईश्वर की तरफ़ से नहीं मिलते बल्कि उन्हें हम ख़ुद अपनी ज़िंदग़ी के लिए चुनते हैं। उन्हीं में से एक रिश्ता है दोस्ती का, हम अपने दोस्त ख़ुद ही चुनते हैं। ये दोस्त हमारी खुशी में साथ नाचते हैं, तो ग़म में हाथ थामे रहते हैं। इन्हीं दोस्तों के नाम शायरों ने भी ख़ूब कलाम लिखे लेकिन जो लोग दोस्ती के नाम पर फ़रेब करते हैं उनकी वजह से सरल-मन शायर आहत भी हुए। इन्हीं जज़्बातों के उन्होंने अपनी कलम में उतारा है। 

पेश हैं शायरों के दोस्ती पर लिखे शेर
 

मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ भी न मिला
- बशीर बद्र


लोग डरते हैं दुश्मनी से तेरी
हम तेरी दोस्ती से डरते हैं
- हबीब जालिब

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हटाए थे जो राह...

हटाए थे जो राह से दोस्तों की
वो पत्थर मेरे घर में आने लगे हैं
- ख़ुमार बाराबंकवी


हम को यारों ने याद भी न रखा
'जौन' यारों के यार थे हम तो
- जौन एलिया

तुझे कौन जानता था...

तुझे कौन जानता था मेरी दोस्ती से पहले
तेरा हुस्न कुछ नहीं था मेरी शाइरी से पहले
- कैफ़ भोपाली


जो दोस्त हैं वो माँगते हैं सुलह की दुआ
दुश्मन ये चाहते हैं कि आपस में जंग हो
- माधव राम जौहर

दुश्मनों से प्यार...

दुश्मनों से प्यार होता जाएगा
दोस्तों को आज़माते जाइए
- ख़ुमार बाराबंकवी


दुश्मनों ने जो दुश्मनी की है
दोस्तों ने भी क्या कमी की है
- हबीब जालिब

दुश्मनों के सितम का...

दुश्मनों के सितम का ख़ौफ़ नहीं
दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं
- शकील बदायुनी


दुश्मनी ने सुना न होगा
जो हमें दोस्ती ने दिखलाया
- ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दोस्ती जब किसी से...

दोस्ती जब किसी से की जाए
दुश्मनों की भी राय ली जाए
- राहत इंदौरी


दोस्ती आम है लेकिन ऐ दोस्त
दोस्त मिलता है बड़ी मुश्किल से
- हफ़ीज़ होशियारपुरी

दोस्त दिल रखने को...

दोस्त दिल रखने को करते हैं बहाने क्या किया
रोज़ झूटी ख़बर-ए-वस्ल सुना जाते हैं
- माधव राम जौहर


आ कि तुझ बिन इस तरह ऐ दोस्त घबराता हूँ मैं
जैसे हर शय में किसी शय की कमी पाता हूँ मैं
- जिगर मुरादाबादी

दोस्तों को भी मिले...

दोस्तों को भी मिले दर्द की दौलत या रब
मेरा अपना ही भला हो मुझे मंज़ूर नहीं
- हफ़ीज़ जालंधरी
 

हमें भी आ पड़ा है दोस्तों से काम कुछ यानी
हमारे दोस्तों के बेवफ़ा होने का वक़्त आया
- हरी चंद अख़्तर

इस से पहले कि...

इस से पहले कि बे-वफ़ा हो जाएँ
क्यूँ न ऐ दोस्त हम जुदा हो जाएँ
- अहमद फ़राज़


मेरा ज़मीर बहुत है मुझे सज़ा के लिए
तू दोस्त है तो नसीहत न कर ख़ुदा के लिए
- शाज़ तमकनत

शर्तें लगाई जाती नहीं...

शर्तें लगाई जाती नहीं दोस्ती के साथ
कीजे मुझे क़ुबूल मिरी हर कमी के साथ
- वसीम बरेलवी


ज़िद हर इक बात पर नहीं अच्छी
दोस्त की दोस्त मान लेते हैं
- दाग़ देहलवी

8 वर्ष पहले
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