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इश्क़ में 'जुदाई' और ये 20 बड़े शेर...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  मिलन और जुदाई प्रेम के दो पहलू हैं। लेकिन जुदाई एक ऐसी घटना है जिसमें आशिक और माशूक, दोनों अपने अमन-चैन खो देते हैं। कोई शायर जब ऐसे तजुर्बे से गुजरता है तब वह उन एहसासों को अपनी शायरी में ढालकर उन्हें अमर कर देता है। शेरों-शायरी की श्रृंखला में आज हम पाठकों के लिए पेश कर रहे हैं 'जुदाई' पर शायरों के अल्फ़ाज-

अब जुदाई के सफ़र को मेरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आकर न परेशान करो
-मुनव्वर राना

अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख़्वाबों में मिलें
जिस तरह सूखे हुए फूल किताबों में मिलें
-अहमद फ़राज़
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नज़र की इनायत का शुक्रिया

इस मेहरबाँ नज़र की इनायत का शुक्रिया
तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
-अज्ञात

इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की
-अहमद फ़राज़

जाने उस की जुदाई क्या होगी
जिसका मिलना ही हादसा है मुझे
-रूही कंजाही

घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं

न बहलावा न समझौता जुदाई सी जुदाई है
'अदा' सोचो तो ख़ुशबू का सफ़र आसाँ नहीं होता
- अदा जाफ़री

महीने वस्ल के घड़ियों की सूरत उड़ते जाते हैं
मगर घड़ियां जुदाई की गुज़रती हैं महीनों में
- अल्लामा इक़बाल

मेरे और उस के दरमियां निकला
उम्र भर की जुदाई का रिश्ता
- जौन एलिया

ग़म जुदाई का 

तुमको ही सहना है ग़म जुदाई का 
मेरा क्या है मैं तो मर जाऊंगी 

हर आग़ाज़ पहुंचता है अंजाम को
मिलन का पीछा करती है जुदाई
-अज्ञात 

उसको जुदा हुए भी ज़माना बहुत हुआ
अब क्या कहें ये क़िस्सा पुराना बहुत हुआ
-अहमद फ़राज़

रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था

उसको रुख़्सत तो किया था मुझे मालूम न था
सारा घर ले गया घर छोड़ के जाने वाला
-निदा फ़ाज़ली

जाने उसकी जुदाई क्या होगी
जिसका मिलना ही हादसा है मुझे
-रूही कंजाही

पीली पीली रुत जुदाई की अचानक आएगी
क़ुर्बतों का सब्ज़ मौसम बेवफ़ा हो जाएगा
-रशीद कामिल

अंजाम जुदाई था अगर

ये मुलाक़ात आख़िरी तो नहीं
हम जुदाई के डर से पूछते हैं
-राहत इंदौरी

हर मुलाक़ात का अंजाम जुदाई था अगर
फिर ये हंगामा मुलाक़ात से पहले क्या था
- एजाज़ गुल

मैं टूट जाता हूँ और दूर जा बिखरता हूँ
अगर जुदाई का सदमा ज़रा भी होता है
-अज्ञात 

आँख अब तेरी जुदाई पे खुली

आंख अब तेरी जुदाई पे खुली
होश में तुझ को गंवाकर आया
-रशीद कामिल

जिसकी आँखों में कटी थीं सदियां
उसने सदियों की जुदाई दी है
-गुलज़ार

बीमार-ए-मोहब्बत का ख़ुदा है जो सँभल जाए
है शाम भी मख़दूश जुदाई की सहर भी
- बेख़ुद देहलवी
8 वर्ष पहले
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