हिंदी फ़िल्मों के यशस्वी और कालजयी अभिनेता अमिताभ बच्चन को उनका यह नाम किसने दिया, यह जानने की उत्सुकता सभी को होगी। हिंदी साहित्य के विलियम वर्ड्सवर्थ कहे जाने वाले छायावाद के बड़े कवि सुमित्रानंदन पंत ने महानायक अमिताभ बच्चन को अमिताभ कहकर पुकारा था। प्रकृति के एक कुशल चितेरे कवि के मुख से निकला यह नाम आज दुनियाभर में प्रसिद्ध है। पिता हरिवंश राय बच्चन भी छायावाद के एक बड़े स्तंभ थे।
नतीजतन उनके घर में कवियों का आना जाना लगा रहता था। सुमित्रानंदन पंत से हरिवंश राय बच्चन की गाढ़ी दोस्ती थी। वह समय-समय पर बच्चन के घर आया करते थे। अमिताभ के घर में कवियों की महफ़िल लगी रहती थी। काव्य पाठ का अक्सर आयोजन होता था। हरिवंश राय बच्चन के घर श्री अरविंदो भी आते रहते थे। प्रखर विद्वानों की उपस्थिति तथा साहित्यिक और काव्यमय माहौल के बीच अमिताभ इलाहाबाद में बड़े हो रहे थे।
विजयादशमी के दिन 11 अक्टूबर, 1942 को अमिताभ का जन्म हुआ था। बचपन में उनकी मां तेजी बच्चन उन्हें मुन्ना कहकर बुलाया करतीं थीं। पिता हरिवंश राय बच्चन ने अपने बड़े बच्चे का नाम इंक़लाब रख दिया था। इसी बीच एक दिन उनके घर सुमित्रानंदन पंत का आना हुआ। बालक अमिताभ उनके सामने आए तो उन्होंने पिता हरिवंश राय से नाम पूछा तो उन्होंने नाम बताया इंक़लाब, पंत इससे संतुष्ट नहीं हुए और तपाक से कहा कि इस बालक को अमिताभ नाम से पुकारो।
पंत को भी यह शायद उस वक्त पता नहीं होगा कि वे बालक के लिए जो नाम रख रहे हैं वह एक दिन देश दुनिया में एक जाना माना नाम हो जाएगा। अमिताभ नाम का वास्तविक मतलब होता है हमेशा चमकते रहने वाला। जिसकी कभी आभा ख़त्म नहीं होती है।
नैनीताल के शेरवुड कालेज और दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से अमिताभ ने अपनी पढ़ाई पूरी की। पिता हरिवंश राय की साहित्यिक प्रतिभा का असर अमिताभ के जीवन पर पड़ा। बच्चन अंग्रेज़ी के प्रोफेसर थे पर कविता हिंदी में लिखते थे। लिहाज़ा अमिताभ के अंदर ऐसी प्रतिभा का गहरा असर पड़ना स्वाभाविक है।
अमिताभ के अंदर रचे बसे रंगमंच की एक वजह हरिवंश राय बच्चन की काव्य प्रतिभा भी हो सकती है। पिता से हमेशा प्रभावित अमिताभ के अंदर का कवि हृदय समय-समय पर छलकते रहता है। वह पिता हरिवंश राय बच्चन की काफ़ी सारी कविताओं का पाठ करते रहते हैं। 'मधुशाला' का पाठ तो अमिताभ बड़ी तन्मयता से करते हैं।
हरिवंश राय बच्चन ने मधुशाला, मधुबाला, मधुकलश, निशा निमंत्रण सहित अन्य रचनाएं लिखीं। उनकी साहित्यिक सोच सकारात्मक ऊर्जा से ओत प्रोत है। मधुशाला उनकी सबसे बेहतर कृति मानी जाती है। लेकिन हरिवंश राय की अगर समूची साहित्यिक प्रतिभा का आकलन किया जाए तो उनकी सबसे बेहतर कृति अमिताभ बच्चन हो सकते हैं। वैसे हरिवंश राय बच्चन ने भी कभी स्वीकार किया था कि अमिताभ उनकी एक विशिष्ट रचना हैं।
6 वर्ष पहले