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'अदब' पर कहे शायरों के अल्फ़ाज़

काव्य डेस्क

Urdu Adab
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अदब लाख था फिर भी उन की तरफ़
नज़र मेरी अक्सर रही देखती
- अज्ञात


अदब ही ज़िंदगी में जब न आया
अदब में इतनी मेहनत किस लिए है
- अता आबिद

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अब इस से पहले कि रुस्वाई अपने घर आती
तुम्हारे शहर से हम बा-अदब निकल आए
- मुईद रशीदी


दूर बैठा ग़ुबार-ए-'मीर' उस से
इश्क़ बिन ये अदब नहीं आता
- मीर तक़ी मीर

इश्क़ अदब है तो अपने आप आए
गर सबक़ है तो फिर पढ़ा मुझ को
- सरफ़राज़ नवाज़


भरी बज़्म में राज़ की बात कह दी
बड़ा बे-अदब हूं सज़ा चाहता हूँ
- अल्लामा इक़बाल

उन के आगे भी दिल को चैन नहीं
बे-अदब को अदब नहीं आता
- आरज़ू लखनवी


वो जो रात मुझ को बड़े अदब से सलाम कर के चला गया
उसे क्या ख़बर मिरे दिल में भी कभी आरज़ू-ए-गुनाह थी
- अहमद मुश्ताक़

मिरी ख़ाक भी उड़ेगी बा-अदब तिरी गली में
तिरे आस्तां से ऊंचा न मिरा ग़ुबार होगा
- मुबारक अज़ीमाबादी


वो किसी का अदब नहीं करते
जो नहीं जानते अदब कुछ भी
- अतहर नादिर

4 वर्ष पहले
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