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21 वो शेर जो आपके अंदर आत्मविश्वास पैदा कर देते हैं...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                            बंदा तो इस इकरार पै बिकता है तेरे हाथ,
        
                                                    
                            
लेना है अगर मोल तो आज़ाद न करना। 
नज़्म तबातबाई

अपना ज़माना आप बनाते हैं अहले दिल,
हम वो नहीं कि जिसको ज़माना बना गया।
 जिगर मुरादाबादी 

वही हक़दार हैं किनारों के,
जो बदल दें बहाव धारों के। 
निसार इटावी 

ख़ुदा तौफीक़ देता है जिन्हें, वो यह समझते हैं,
कि ख़ुद अपने ही हाथों से बना करती हैं तक़दीरें। 
अफ़सर मराठी 

कुछ लोग थे कि वक़्त के सांचे में ढल गए,
कुछ लोग थे कि वक़्त के सांचे में बदल गए। 
मख़मूर सईदी 

अब हवाएं ही करेंगी रौशनी का फ़ैसला
जिस दिए में जान होगी वो दिया रह जाएगा। 
महशर बदायुनी

इन्ही ग़म की घटाओं से ख़ुशी का चांद निकलेगा
अंधेरी रात के पर्दे में दिन की रौशनी भी है। 
अख़्तर शीरानी

जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं
वही दुनिया बदलते जा रहे हैं। 
जिगर मुरादाबादी

तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर। 
अमीर मीनाई

तू शाहीं है परवाज़ है काम तेरा
तिरे सामने आसमां और भी हैं। 
अल्लामा इक़बाल

भंवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो
कहां तक चलोगे किनारे किनारे। 
रज़ा हमदानी

हज़ार बर्क़ गिरे लाख आंधियां उठें
वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं। 
साहिर लुधियानवी

मेरे टूटे हौसले के पर निकलते देख कर
उस ने दीवारों को अपनी और ऊंचा कर दिया। 
आदिल मंसूरी  

सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है
देखना है ज़ोर कितना बाज़ू-ए-क़ातिल में है। 
बिस्मिल अज़ीमाबादी

हम को मिटा सके ये ज़माने में दम नहीं
हम से ज़माना ख़ुद है ज़माने से हम नहीं। 
जिगर मुरादाबादी  

हवा ख़फ़ा थी मगर इतनी संग-दिल भी न थी
हमीं को शमअ जलाने का हौसला न हुआ। 
क़ैसर-उल जाफ़री  

गर शौके-तसादुम है तो टकराए जमाना,
इक उम्र में पत्‍थर का जिगर हमने बनाया। 
सागर निजामी 

देख यूं वक़्त की दहलीज़ से टकरा के न गिर,
रास्ते बंद नहीं सोचने वालों के लिए। 
फारिग़ बुख़ारी 

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले 
ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है। 
अल्लामा इक़बाल 

कहिए तो आसमां को ज़मीं पर उतार लाएं 
मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिए। 
शहरयार 

दाग़ दुनिया ने दिए ज़ख़्म ज़माने से मिले
हम को तोहफ़े ये तुम्हें दोस्त बनाने से मिले
कैफ़ भोपाली
8 वर्ष पहले
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