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ये चुनिंदा 10 शेर आपको सौंदर्य से रूबरू कराएंगे...

काव्य डेस्क

Kavya Charcha
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                                                  शेरों-शायरी की दुनिया में सौंदर्य का उल्लेख संजीदगी से किया गया है। बड़े शायरों ने सौंदर्य को एक गहरा एहसास माना है। शक्ति का स्वरूप माना है। ईश्वर की यह नेमत प्रेम और इश्क की दुनिया को गुलजार करती है। सौंदर्य कई शायरों की काव्य प्रतिभा की मुख्य वजह मानी गई है। काव्य चर्चा में हम यहां अपने पाठकों के लिए सौंदर्य को बयां कर रहे 10 चुनिंदा शेर पेश कर रहे हैं।     
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है...

हजारों साल नरगिस अपनी बेनूरी पे रोती है
बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदावर पैदा
- इकबाल

गुनगुनाती हुई आती हैं फलक से बूंदें
कोई बदली तेरी पाजेब से टकरायी है
- अज्ञात

बाम पर चढ़कर किसी ने बाल जो बिखरा दिए...

बाम पर चढ़कर किसी ने बाल जो बिखरा दिए
पानी-पानी हो गयी काली घटा बरसात की
- अज्ञात 

क्या नजाकत है कि आरिज उनके नीले पड़ गए
हमने तो बोसा लिया था ख्वाब में तसवीर का
- अज्ञात 
 

क्या नजाकत है कि आरिज उनके नीले पड़ गए...

क्या नजाकत है कि आरिज उनके नीले पड़ गए
हमने तो बोसा लिया था ख्वाब में तसवीर का
- अज्ञात 

दिल में आते हुए शरमाते हैं 
अपने जलवों में छुपे जाते हैं 
- अज्ञात 
 

क्या हुस्न का अफसाना महदूद हो लफ्जों में...

क्या हुस्न का अफसाना महदूद हो लफ्जों में 
आंखें ही कहें उसको, आंखों ने जो देखा है 
- अज्ञात 

रुखे-रोशन के आगे शम्अ रखकर वो ये कहते हैं
उधर जाता हैं देखें या इधर परवाना आता है 
- अज्ञात 

वो आए बज्म में इतना तो मीर ने जाना...

वो आए बज्म में इतना तो मीर ने जाना 
फिर इसके बाद चिरागों में रोशनी न रही 
- मीर 

कल चौदहवीं का चांद था, शब भर रहा चर्चा तेरा
कुछ ने कहा ये चांद है, कुछ ने कहा चेहरा तेरा 
- हसरत मोहानी 

साभार-अंदाज अपना अपना  संचयन-रमेश चंद्र 
भारतीय ज्ञानपीठ प्रकाशन
8 वर्ष पहले
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