विज्ञापन

सुरजीत पातर की कविता- मैं पहली पंक्ति लिखता हूँ और डर जाता हूँ

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            मैं पहली पंक्ति लिखता हूँ
        
                                                    
                            
और डर जाता हूँ राजा के सिपाहियों से
पंक्ति काट देता हूँ

मैं दूसरी पंक्ति लिखता हूँ
और डर जाता हूँ बाग़ी गुरिल्लों से
पंक्ति काट देता हूँ

मैंने अपने प्राणों की ख़ातिर
अपनी हज़ारों पंक्तियों को
ऐसे ही क़त्ल किया है

उन पंक्तियों की आत्माएँ
अक्सर मेरे आसपास ही रहती हैं
और मुझे कहती हैं :
कवि साहिब !
कवि हैं या कविता के क़ातिल हैं आप ?

सुना कि मुंसिफ़ बहुत से होते हैं
इनसाफ़ के क़ातिल
बड़े धर्म के रखवाले
ख़ुद धर्म की पवित्र आत्मा को
क़त्ल करने वाले लोगों के बारे में भी सुना था,

सिर्फ़ यही सुनना बाक़ी था
कि हमारे वक़्त में ख़ौफ़ के मारे
कवि भी बन गए
कविता के हत्यारे ।

हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।

11 घंटे पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Nathuram Kaswan

8651 कविताएं

View Profile

SATYENDRA KUMAR

112 कविताएं

View Profile