विज्ञापन

रामधारी सिंह 'दिनकर': लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम

काव्य डेस्क

Kavita
विज्ञापन
                                    
                                                                        
                            

लिख रहे गीत इस अंधकार में भी तुम


रवि से काले बरछे जब बरस रहे हैं,
सरिताएँ जम कर बर्फ हुई जाती हैं,
जब बहुत लोग पानी को तरस रहे हैं?

इन गीतों से यह तिमिर-जाल टूटेगा?
यह जमी हुई सरिता फिर धार धरेगी?
बरसेगा शीतल मेघ? लोग भीगेंगे?
यह मरी हुई हरियाली नहीं मरेगी?

तो लिखो, और मुझ में भी जो आशा है,
उसको अपने गीतों में कहीं सजा दो।
ज्योतियाँ अभी इसके भीतर बाकी हैं,
लो, अंधकार में यह बाँसुरी बजा दो। 
 
हमारे यूट्यूब चैनल को Subscribe करें।
एक महीने पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Manju Sharma

3561 कविताएं

View Profile