भारतीय रक्त में उबाल है
जोश जोश जोश बेमिसाल है
एक एक साल का कठोर तप
एक राग एक मंत्र एक जप
वर्ल्डकप वर्ल्डकप वर्ल्डकप
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श्वास श्वास ले रही हिलोर है
आस जीत की हरेक ओर है
चूकना नहीं अचूक वार से
शोर शोर शोर शोर शोर है
आज काम काज है हरेक ठप
वर्ल्डकप वर्ल्डकप वर्ल्डकप
आज सर्वकार्यसिद्धि योग है
जीत वीर का प्रसिद्ध भोग है
देव की कृपा सदैव साथ है
मिट गया हरेक शोक रोग है
आखिरी बची हुई यही तड़प
वर्ल्डकप वर्ल्डकप वर्ल्डकप
शत्रु की कलाइयाँ मरोड़ दो
रणविजय करो कि राह मोड़ दो
घाव दो वही कि जो भरे नहीं
टाँग पर रखो कि टाँग तोड़ दो
पक्ष दूसरा न फिर सके पनप
वर्ल्डकप वर्ल्डकप वर्ल्डकप
-प्रवीन पाण्डेय