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Hindi Poetry: पवन कुमार मिश्र की कविता- चम्पई फूलों से रूप का सिंगार कर

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  कोहरे का घूंघट,
हौले से उतार कर।
चम्पई फूलों से,
रूप का सिंगार कर।

अम्बर ने प्यार से,
धरती को जब छुआ।
गुलाबी ठंडक लिए,
महीना दिसम्बर हुआ।

धूप गुनगुनाने लगी,
शीत मुस्कुराने लगी।
मौसम की ये खुमारी,
मन को अकुलाने लगी।

आग का मीठापन जब,
गुड से भीना हुआ।
गुलाबी ठंडक लिए,
महीना दिसम्बर हुआ।
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हवाएं हुई संदली,
चाँद हुआ शबनमी।
मोरपंख सिमट गए,
प्रीत हुई रेशमी।

बातों-बातों में जब,
दिन कहीं गुम हुआ।
गुलाबी ठंडक लिए,
महीना दिसम्बर हुआ।
2 वर्ष पहले
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