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Hindi Kavita: रघुवीर सहाय की कविता 'कितने अनुभवों की स्मृतियाँ ये किशोर मुँह जोहते हैं'

काव्य डेस्क

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कितने अनुभवों की स्मृतियाँ
ये किशोर मुँह जोहते हैं सुनने को
पर मैं याद कर पाता हूँ तो बताते हुए डरता हूँ
कि कहीं उन्हें पथ से भटका न दूँ
मुझे बताना चाहिए वह सब
जो मैंने जीवन में देखा समझा
परन्तु बहुत होशियारी के साथ
मैं उन्हें अपने जैसा बनने से बचाना चाहता हूँ

2 वर्ष पहले
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