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Happy New Year 2024: ओम निश्चल का गीत- वे सुखी हों जो मजलूम हैं

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  वे सुखी हों जो मजलूम हैं
अब भी खुशियों से महरूम हैं
सर्द रातें हैं जिनके लिए
जिंदगी से जो महरूम हैं, 
उनके कदमों में जन्नत झुके
मुस्करा उट्ठें हर  हाल में।
कुछ नया हो नए साल में।

दर्द से अब भी सीझी हुई 
यह धरा  खूँ से भीगी हुई 
विश्वयुद्धों के अभिशाप यह 
जाने कब से है ढोती हुई 
रंजो-गम के मसाइल न हों
आसमां में मिसाइल न हों 
शांति के रथ रहें दौड़ते 
युद्ध के ऐसे दुष्काल में 
हो नया कुछ नए साल में!
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हों मुहब्बत के मारे सभी
नेह - भीगे  हुए  नैन  हों
भाव-भीने से अंदाज़ हों
रस में  डूबे  हुए  बैन  हों
एक चींटी भी स्वायत्त हो
सुख परिश्रम से आयत्त हो
छू सके आत्मा को मनुज
भर उठे  एक सुर-ताल में।
हो नया कुछ नए साल में।
2 वर्ष पहले
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