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Dr Om Nishchal Poetry: कुछ करो, यह प्यार का मौसम ठहर जाए

काव्य डेस्क

Kavita
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                                                  मेघ का, मल्हार का 
मौसम ठहर जाए।
कुछ करो----
यह प्यार का मौसम ठहर जाए।

जल रहा मन आज
सुधियों के अंगारों में
दर्द कुछ हल्का हुआ है
इन फुहारों में
रूप का, अभिसार का मौसम ठहर जाए।

बादलों की गंध में 
खोया हुआ है मन
हो रही है शिराओं में
सावनी सिहरन
जीत का, यह हार का मौसम ठहर जाए।
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तुम सुनाओ ग़ज़ल कोई
गीत हम गाएं
क्या पता हम तुम कहीं
फिर दूर हो जाऍं 
मान का, मनुहार का मौसम ठहर जाए।
कुछ करो यह प्यार का मौसम ठहर जाए। 

 
2 वर्ष पहले
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