ज़े हाले मिसकीं मकुन तग़ाफ़ुल
दुराय नैना बनाय बतियाँ।
कि ताबे-हिजरा न दारम् ऐ जां
न लेहु काहे लगाय छतियाँ॥
शबाने-हिजराँ दराज़ चूं ज़ुल्फ़ो—
रोज़े वसलत चूं उम्र कोताह।
सखी पिया को जो मैं न देखूँ
तो कैसे काटूँ अँधेरी रतियाँ॥
विज्ञापन
यकायक अज़दिल दो चश्म जादू
बसद फ़रेबम बुबुर्द तसकी।
किसे पड़ी है जो जा सुनावे
पियारे पी को हमारी बतियाँ॥
चु शमअ सोज़ा चु ज़र्रा हैरां
ज़े मेहरे आंमह बगश्तम् आख़िर।
न नींद नैनां न अंग चैना
न आप आवें न भेजें पतियां॥
ब हक्क़े रोज़े-विसाले दिलवर
कि दाद मारा फ़रेब ख़ुसरो।
सो पीत मन की दुराय राखों
जो जान पाऊँ पिया की घतियां॥
अर्थ - मुझ ग़रीब मिस्कीन की हालत से यूँ बेख़बर मत बनो। आँखें मिलाते हो, आँखें चुराते हो और बातें बनाते हो। मेरी जान! जुदाई की ताब सहने का सामर्थ्य मुझमें नहीं है। मुझे अपने सीने से क्यों नहीं लगा लेते! जुदाई की रातें ज़ुल्फ़ की तरह लंबी हैं और मिलन के दिन ज़िदगी की तरह छोटे हैं। हे सखी! मैं यदि अपने पिया को न देखूँ तो डरावनी व अँधेरी रातें कैसे कटे! जादू भरी इन दोनों आँखों ने अचानक सैकड़ों बहानों से मेरा धैर्य छीन लिया है। किसके पास वक़्त है या किसे पड़ी है जो मेरे जी की बात सुने अर्थात मेरा दुःख सुने। मैं शमाँ की तरह जल रहा हूँ और ज़र्रे की तरह हैरान हूँ, आख़िरकार मैं उस बुत (कठोर दिल) की मोहब्बत में गिरफ़्तार हो गया हूँ। मेरी आँखों में ना नींद है और ना दिल को चैन है। और मेरा प्रिय इतना निष्ठुर है कि ना तो आप आता है और ना ही चिट्ठियाँ ही भेजता है। मिलन वाले दिनों की क़सम, मेरे महबूब ने मेरे साथ फ़रेब किया है। मैं अपनी प्रीत को अपने दिल में दबाकर रखती अगर मैं जानती कि मेरे महबूब से मुझे फ़रेब मिलेगा।