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गणतंत्र दिवस 2022 - एक जोश-ए-सरमदी है 'छब्बीस जनवरी' है

काव्य डेस्क

Urdu Adab Irshaad
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गुलशन में रुत नई है
हर सम्त बे-ख़ुदी है
हर गुल पे ताज़गी है
मसरूर ज़िंदगी है
सरचश्मा-ए-ख़ुशी है
छब्बीस जनवरी है

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हर सू ख़ुशी है छाई
सब ने मुराद पाई
फिर जनवरी ये आई
यौम-ए-सुरूर लाई
साअ'त मुराद की है
छब्बीस जनवरी है

आंखों में रंग-ए-नौ है
बातिल से जंग-ए-नौ है
साज़ और चंग-ए-नौ है
हर दर पे संग-ए-नौ है
पुर कैफ़ ज़िंदगी है
छब्बीस जनवरी है

मैं गुनगुना रहा हूं
मस्ती में गा रहा हूं
ख़ुशियां मना रहा हूं
आलम पे छा रहा हूं
दिल महव-ए-बे-ख़ुदी है
छब्बीस जनवरी है

हिन्दोस्तान ख़ुश है
हर पासबान ख़ुश है
हर नौ-जवान ख़ुश है
सारा जहान ख़ुश है
एक जोश-ए-सरमदी है
छब्बीस जनवरी है

~कँवल डिबाइवी
4 वर्ष पहले
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