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काका के व्यंग्य: झूठ बराबर तप नहीं

रत्नेश मिश्र

Hasya
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                            झूठ बराबर तप नहीं, साँच बराबर पाप    
        
                                                    
                            
जाके हिरदे साँच है, बैठा-बैठा टाप
    
बैठा-बैठा टाप, देख लो लाला झूठा    
'सत्यमेव जयते' को दिखला रहा अँगूठा
    
कह ‘काका ' कवि, इसके सिवा उपाय न दूजा    
जैसा पाओ पात्र, करो वैसी ही पूजा

- काका हाथरसी
7 वर्ष पहले
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