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हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली- डाॅ. राहुल अवस्थी

काव्य डेस्क

Irshaad
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                                                  इल्ज़ाम पे इल्ज़ाम की घटाएँ हैं छायी
तोहमतों पे तोहमतें गयी हैं मुझ पे लगायी
दो बातें करने मैं तुम्हारे पास हूँ आयी
दुनिया की हर ज़बान से भरी मेरी झोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

आत्मा में मैंने पालि की मर्याद समेटी
प्राकृत के तेवरों में मैं गयी हूँ लपेटी
नातिन हूँ संस्कृत की मैं अपभ्रंश की बेटी
हमजोली बोलियों की ताबोआब सँजो ली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली
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आवेश दिया है मुझे भूषण के छंद ने

बिजली-सा किया है मुझे दिनकर अमन्द ने
आवेश दिया है मुझे भूषण के छंद ने
मुझको बना दिया है शब्दवेधी चंद ने
जयसिंह की चेतना की आँख मैंने ही खोली 
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

रसखान ने लज़्ज़त का मेरी जाम पिया है
कबिरा ने, जायसी ने मुझे आम किया है
ख़ुसरो ने हिन्दवी-सा मुझे नाम दिया है
रहिमन ने कलाई पे मेरी बाँधी है मोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

मुझको है घनानन्द ने असीम चाह दी

मुझको है घनानन्द ने असीम चाह दी
मीरा ने प्रीति दी औ' प्रीति बेपनाह दी
नज़रों से सूर सूर ने नई निगाह दी
तुलसी ने लगायी है मेरे माथे पे रोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

ताक़त दी महादेवी की कराह-आह ने
शीतल हुई हूँ मैं प्रसाद जी के दाह में
मुझको निराला ने चलाया मुक्त राह पे
सुनकर के सुभद्रा को अपनी अस्मिता तोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

मुझमें  सुभाष ने स्वभावस्नान किया है

मुझमें  सुभाष ने स्वभावस्नान किया है
अभिमान दयानन्द ने प्रदान किया है
मेरा महात्मा गाँधी ने गुणगान किया है
जो मेरे साथ हो लिया मैं उसकी ही हो ली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

मुझसे ही अस्मिता का स्वाभिमान जिया है
मुझको नरेंद्र मोदी ने सम्मान दिया है
मुझपे अटल बिहारी ने गुमान किया है
मैंने ही राष्ट्रधर्मिता की नब्ज़ टटोली 
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

अय्यर ने मुझे राष्ट्रभाषा की गुहार की

अय्यर ने मुझे राष्ट्रभाषा की गुहार की
कुट्टन ने द्रविड़ होके मुझे आर्य-शक्ति दी
मुझमें ही लिख रहे हैं बालशौरि रेड्डी
फिर भी क्यों मिल रही है मुझे ज़हर की गोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

रस्ते पे साजिशों के अंधेरों में बंद हूँ
फिर भी मैं गढ़-विजय का हूँ साधन, कमन्द हूँ
फिल्मों के लिए आज भी पहली पसंद हूँ
मैंने हरेक हाल में रस की डली घोली
हिंदी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली

कुछ लोग मढ़ रहे हैं मेरे वर्णदान को
कुछ लोग गढ़ रहे हैं मेरे संविधान को
कुछ लोग पढ़ रहे हैं मेरे वर्तमान को
कुछ लोग कर रहे हैं मेरे साथ ठिठोली
हिन्दी है मेरा नाम मैं हूँ हिन्द की बोली
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