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अटल बिहारी वाजपेयी: जीवन की ढलने लगी सांझ...

काव्य डेस्क

Irshaad
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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की दिल्ली के एम्स में हालत नाजुक है। अमर उजाला डिजिटल देश के इस गौरवशाली पूर्व् प्रधानमंत्री के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता है। अटल जी ने हमेशा जीवन की चुनौतियों का आगे बढ़कर सामना किया है। अपने राजनीतिक जीवन में कविताओं से लोगों का मन मोहने वाले अटल जी की कुछ कविताएं तो दिल को छू जाती हैं। हम यहां आपको उनकी लेखनी से परिचित करा रहे हैं।



जीवन की ढलने लगी सांझ
उमर घट गई
डगर कट गई
जीवन की ढलने लगी सांझ।

बदले हैं अर्थ
शब्द हुए व्यर्थ
शान्ति बिना खुशियाँ हैं बांझ।

सपनों में मीत
बिखरा संगीत
ठिठक रहे पांव और झिझक रही झांझ।
जीवन की ढलने लगी सांझ।

साभार- कविताकोश
8 वर्ष पहले
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