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प्रधानमंत्री की 'दीप' अपील पर कानपुर के कवियों ने भेजीं अपनी रचनाएं

दीपाली अग्रवाल

Halchal
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                                                  लॉकडाउन के बीच प्रधानमंत्री मोदी ने रविवार रात नौ बजे नौ मिनट के लिए दीये जलाने की अपील की है। प्रधानमंत्री की उसी अपील पर कानपुर के कवियों ने अपनी रचनाएं भेजी हैं। पढ़िए कानपुर के कवियों और शायरों की रचनाएं...    
                                                              
                  

                    
                                        
                         
                                                                                   
                            
                         
                                                            
                                
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शीतल वाजपेयी

PC: अमर उजाला

दीप जगमगा उठे हैं प्रेम और प्रीत के।
संयम-समर्पण के, अपनों की जीत के।
दंभ-द्वेष द्वार खड़ा दर्प को पुकारता, 
किन्तु मन का धैर्य धर्म नीति को संवारता,
भेदभाव भूल, भाव समझो मनमीत के।
दीप जगमगा उठे हैं प्रेम और प्रीत के ।
- शीतल वाजपेयी

आनन्द पांडेय

PC: अमर उजाला

कोरोना   से   जंग   को   देश  गया  है जाग,
आओ मिल कर आज हम रोशन करें चराग़।
रोशन   करें   चराग़   डरों   को   दूर  भगाएं,
एक  नया  विश्वास  दिलों  में  आज  जगाएं।
मतभेदों   को   भूल   कर  लड़नी है यूं जंग,
सारी   दुनिया  देख  कर  हमको  होती दंग।
- आनन्द पांडेय तन्हा, कानपुर

मनीष मीत

PC: अमर उजाला

हर  एक दर पे सितारों को चल बिछाते हैं,
हर  एक  छत  पे  नए  चांद चल उगाते हैं,
मशाल हौसलों की मिल के  सब उठाते हैं,
घने  तिमिर  को  दिलों से चलो हटाते हैं,
वतन   पुकारता  अपने   तुझे  बुलाते  हैं,
दिये  उम्मीद  के  आओ  कि अब जलाते है।
- मनीष मीत

अशोक चारण

PC: अमर उजाला

आ गई है विश्व में संध्या शिथिल सी
हर्ष की मृदु लालिमा अवसाद में भीगी हुई है
मुक्ति की अवधारणा आ कर खड़ी है द्वार पर फिर
प्राण है संशय में कि किस वाद में भीगी हुई है
विचारों के वृक्ष का फलना ज़रूरी हो गया है 
इसलिए फिर दीप का जलना ज़रूरी हो गया है

दीप जो कि नेह राशि के तरल से
कालिमा को फिर चुनोती दे सकेगा
स्वयं के तल में तिमिर को कैद कर के
धरा को इक धवल ज्योती दे सकेगा
अंधेरों के अस्त्र का गलना ज़रूरी हो गया है
इसलिए फिर दीप का जलना ज़रूरी हो गया है

विश्व के बन्धुत्व में हम बद्ध हो कर
मनुजता को बचा कर बचते रहेंगे
राष्ट्र ने हमको सिखाया है यही कि
युगों तक इतिहास को रचते रहेंगे
पर नीतिवश इस युद्ध से टलना ज़रूरी हो गया है
इसलिए फिर दीप का जलना ज़रूरी हो गया है
- अशोक चारण

शिखा सिंह ऊर्जिता 

PC: अमर उजाला

मन हार गया तन हार गया
मधुवन का चंदन हार गया 
इन झंझावातों में फँस कर
मानव का जीवन हार गया 
नवसंचार प्राण वायु का अब तो ईश्वर को करना होगा
तीन लोक का जो तम हर ले, उस दीपक को जलना होगा 
दूजे का दुख तुम हर के देखो
खुशियों का दीपक धर के देखो 
चलो दिखायें संग हैं हम सब
कल्याण भाव मन भर के देखो
प्रेमभाव, सुख, स्वास्थ्य को अब जन जन के मन में पलना होगा
तीन लोक का जो तम हर ले, उस दीपक को जलना होगा

- शिखा सिंह ऊर्जिता 

आकांक्षा अग्निहोत्री

PC: अमर उजाला

सवा करोड़ हृदय-दीपो को
करूणा से  ज्योतिर्मय कर
लड़ें कोरोना की ये जंग
कर हौसले हम बुलंद
हर ले हर जीवन का हम  तम
बन इक सम्बल और एक मन
तारे फिर सब  धरती पर लाए
आओ,मिलकर हम दीप जलाएं।
- आकांक्षा अग्निहोत्री

 सुरेश साहनी

PC: अमर उजाला

दुनिया पर मंडरा रहा है चीनी आतंक
ज़हर फेंकता है कहीं ,कहीं मारता डंक
कहीं मारता डंक मार है अमरीका तक 
ऑस्ट्रेलिया यूरोप डरा है अफ्रीका तक 
कह सुरेश कविराय  लगाकर सीधी गुनिया
मोदी जी ही आज बचा सकते हैं दुनिया।
- सुरेश साहनी
 

भारतेंदु पुरी

 PC: अमर उजाला

छाया है चारों ओर अंधेरा दुनिया में।
फैला मौतों का शोर पूरी दुनिया में।।
अविश्वास,अज्ञानता है दुनिया में।
टूट रही सांसों की डोर दुनिया में।।
मानव जीवन बच जाए इस दुनिया में।
भारत करता है ऐलान दुनिया में।।
पूरा भारत रौशन हो इन दीपों से।
मिट जाए सारा अंधकार दुनिया में।
- भारतेंदु पुरी

शिवानी सोलंकी

PC: अमर उजाला

 सब जन मिलकर दीप जलाओ
 कोई छुटी ना देहरी हो
 कोना कोना उज्जवल हो जाए
 ये लौ बहुत घनघोरी हो
 दिवाली सी चहुओर मन जाए
 इतनी श्रद्धा सबूरी हो
 समय का सबको ध्यान रहे
 इसमें तनिक ना देरी हो
-  शिवानी सोलंकी
 

नूपुर राहीPC: अमर उजाला

एक दिया जलाऊँगी कोरोना के तूफान में
जन जन का आशीष साथ है मेरे इस अभियान में।
महमारी की हर साजिश का देना हमें जवाब है
नई रौशनी लाएंगे हम अपने हिन्दुस्तान में।।
- नूपुर राही

डॉ. अरुण तिवारी गोपाल

PC: अमर उजााल

घनाक्षरी छंद में अभिनव प्रयोग

दीप हैं, सवा अरब, पर व्रत एक लिये, अंधियारी आंधी में भी, साथ साथ चलना है..
रोना है कोरोना का, अंधेरा महामारी का है,जीत की कसम लिए एक एक दीप है।
नौ का अंक नौका है ये,यज्ञ हेतु मौका है ये, वैष्णवी पुकार वाला टेरता महीप है।
दीप दीप जुड़ के वो सूरज-सपूत लायेंगे,पैर धो पकालें हम जहां निशा-सीप है।
हारी महामारी अंधियारी,उजियारी से ही, अब इस जीत का भी जनम समीप है।।

पूरब की गोदी-मोदी जैसा सारथी कहे ये, बांझ न रहेगी पीर विधि का उलहना है.
दीप हैं सवा अरब, पर व्रत एक लिये, अंधियारी आंधी में भी साथ साथ चलना है.......

चीनी चाल उस पार,पाले बैठी है विकार, पर महाभारत के जाने हम भी छल-बल।
बाजारी अंधेरों से न डरें, एक होके लड़ें, रवियों के पुंज हम,वे ही तो बहेंगे गल।।
जिहादी-जमाती हैं विघाती, मां है पछताती, ऐसे अंधेरों को हम भट्टियों से रहे ढल।
युग-पृष्ठ पर,निशा ने असम्भव जो लिखा,राख कर देंगे उसे, इन्हीं दीपों की अनल।।

दुर्भाग्य की निशा को,सब दीप मिल मथें,युग अमरत्व का प्रकाश-घृत कढ़ना है.
दीप हैं सवा अरब, पर व्रत एक लिये, अंधियारी आंधी में भी साथ साथ चलना है......
- डॉ. अरुण तिवारी गोपाल

डॉ मंजु लता श्रीवास्तव 

PC: अमर उजाला

हम अभी हारे नहीं हैं
माना तिमिर घनघोर है
पर हम अभी हारे नहीं हैं

ज्ञात पर चिंतन  करें अज्ञात से भयभीत कब हम 
आत्मा की शक्ति संचित करके हैं विचलित नहीं हम 
कोटि दीपक हम जलाकर काल को ऐसे भगाएंँ 
भूमि क्या पाताल में भी तमस् के कण रह न पाएं

है घड़ी संकट की फिर भी
नयन जल खारे नहीं हैं

आज राजा ने हमारे मन में फिर शक्ति जगाई 
हम हुए एकांँतवासी इसलिए ज्योति जलाई
दीप छोटे ही सही प्रभु की कृपा से जोड़ देंगे
रोशनी की इस नदी में आचमन नौ ग्रह करेंगे

हैं सभी सन्नद्ध रण में
अवसाद के मारे नहीं हैं

देवदूतों से बने यह डॉक्टर ,नर्सें ,पुलिस हैं 
ले हथेली जान अपनी पत्रकारी जन हुलिस हैं
हो अकेले तुम नहीं उल्लास भर संदेश देकर 
राष्ट्र गौरव गान गायें हाथ अनगिन दीप लेकर

देह से होकर पृथक भी मन से हम न्यारे नहीं हैं

- डॉ मंजु लता श्रीवास्तव 

मुरली परिहार

PC: अमर उजाला

प्रेम ,एकता ,सदभाव के ,गीत सभी को गाने है,
हे भारत के लाल तुम्हे ,नौ बजते दीप जलाने है।

नौ का मतलब ,नौ देवी का हम आवाहन करते है,
आएं मां संहार करें हम, पूर्ण समर्थन करते है,

देश विरोधी तत्वों नेअब अपना रूप दिखाया है,
भारत को घायल करने का,गंदा प्लान बनाया है,

काश्मीर से कन्या कुमारी,सारा भारत एक है,
विश्व गुरु भारत ही होगा,देश का दुश्मन फेक है,

हिंसा जिनका मूलमंत्र है,उनके जितने ठिकाने है,
दुश्मन के घर खोज निकालो, सारे हमें ढहाने है।

- मुरली परिहार

राजीव मिश्रा

PC: अमर उजाला

 बीमारी का करो सफाया,
 सकारात्मक सोच के साथ।
संकट कटे करोना का भी
 जनजीवन फिर चले आबाध।
 कठिन समय है रहेगा कब तक,
ना दे हम हाथों में हाथ ।
आओ दिया जलाएं सब मिल 
गर देश से करते प्रेम अबाध।
-  राजीव मिश्रा

डॉ.कमलेश

PC: अमर उजाला

पूरा देश खड़ा है
कोरोना से करनी है अब  सबको मिलकर फाइट.
रात  नौ  बजे दिया  जलाएं  या  मोबाइल लाइट.
या फिर जला  मोमबत्ती ही  हम प्रकाश  फैलायें.
बिजली करके बंद नौ  मिनट यह संकल्प उठायें-
भले  महामारी  है तगड़ी,  ख़तरा  बहुत  बड़ा  है.
एक  साथ  पर  इससे  लड़ने  पूरा देश  खड़ा  है.
- डाॅ. कमलेश
 

नूरैन फैजाबादी

PC: अमर उजाला

हम दिया घर मे जब जलाएंगे 
चाँद छप्पर  मे झिलमिलाएँगे

अपने दामन मे रौशनी भर के
फूल गुलशन मे  मुस्कराएंगे

हौसलों की बना के तलवारें
हम कोरोना पे अब चलाएंगे

इतना घबराओ ना अंधेरे से
हम समंदर के  पार  जाएंगे
- नूरैन फैजाबादी

आशुतोष तिवारी

PC: अमर उजाला

आज विपदा की घड़ी आ पड़ी,
सभी राष्ट्रभक्ति का फर्ज निभाये,
एक एकता दीप जलाएं..

चौखट,गली औऱ द्वारो पर,
बालकनी,छतो और चौबारों पर,
सब ओर उजियारा फैलाये,
विश्वगुरु की अमर ख्याति,विश्वपटल पर फिर दोहराये,
एक एकता दीप जलाएं...

एक दीप संस्कृति का हो,एक हो उन्माद का,
एक दीप हो कर्तव्य का,एक दीप हो राष्ट्र का,
एक हो विभिनन्ता का,एक अनेकता में एकता का,
अपने महान सहयोग से हम,
कर्तव्य पथ पर अग्रेषित वीरो के प्रति, हम अपना आभार चुकाए,
एक एकता दीप जलाये....

मर्यादा से भीगी हो बाती,सौहार्द का तेल भरा हो,
जब दिया जले घर-घर,लगे कि एक साथ सारा देश खड़ा हो,
हम दीपो की स्रंखला बनाकर,मानवता का प्रकाश फैलाये,
एक एकता दीप जलाएं..
- आशुतोष तिवारी

कपिलPC: अमर उजाला

मेरा देश बदल रहा है
आगे बढ़ रहा है..

कभी शाम हुई तो थाल बजे
कही ताल बजे, कही  शंख बजे,
कभी रात हुई तो अँधकार हुआ
उस अँधकार में बहुत  दीप सजे,
इस सन्नाटे वाले विश्व युध्द में एक दम अदिग रहा है..

क्यूंकि मेरा देश बदल रहा है
आगे बढ़ रहा है...
जब चारों तरफ सन्नाटा है
क्वारंटीन एक नयी आशा है,
सैनिटाइजर और डिस्टेन्शिग से
एक जीने की आश जगाता है,
इस रणभूमि में बिना शस्त्र लिये एक वाइरस से लड़ रहा है...

क्यूंकि मेरा देश बदल रहा है
आगे बढ़ रहा है.......

- कपिल द्विवेदी

आयुषी

PC: अमर उजाला

आज दीपक को नूर से भर दो
करके दीप प्रज्वलित रात को कोहिनूर कर दो
जंग आज जितनी है करके हौसलों को बुलंद
ए दोस्तों आज देश के रंग में खुद को सराबोर कर दो
 है आज विपदा माना यह तम को दूर करके
खुद को उजाले के हवाले कर दो
टूट जाएगी आज कोरोना की भी चेन
बस आज साथ देकर मोदी जी का एक दीप प्रज्वलित कर दो
निश्चय ही जीत होगी आज हमारी
बस आज एकता के सूत्र में सब को एक कर दो

- आयुषी

शेष नारायण त्रिवेदी

PC: अमर उजाला

राजकीय शासन में 5 की संख्या राजा महाराजा के साथ जोड़ी जाती थी। 5 संख्या विजय का प्रतीक होता है। विजयी राजा को 5 संख्या से सम्मानित किया जाता रहा है। धरती, जल, आकाश, वायु एवं अग्नि इन 5 तत्वों पर राजा का अधिकार होता है। इसलिए यह,  पाँचों तत्वों पर से कोरोना पर विजय का प्रतीक है। 
- शेष नारायण त्रिवेदी

कुमार कृष्णा "मोहन"

PC: अमर उजाला

आओ मिलकर दीये जलाएं 
हम सब भारतवासी
हो आम आदमी या वीआईपी
या फिर हो संन्यासी
समय आ गया हम सबको
कदम मिलाकर चलने का
धीरे-धीरे ही सही पर
जीत की ओर बढ़ने का 
मोदी जी के आवाहन पर
सब मिलकर दीप जलाएंगे
संयम औ संकल्प से देश को
 कोरोना मुक्त बनाएंगे  ! 

 -  कुमार कृष्णा "मोहन"
 

देवेंद्र प्रताप सिंह

PC: अमर उजाला

तुम दीप जला लो आँगन में !      
नत्मस्तक रजनी को करके        
अब आंचल में खुशियाँ भर लो,                             
अब अंधकार को दूर करो
तुम मस्तक पर दिनकर धर लो
उज्ज्वल किरणें एकत्र करो,
संसार  बसा लो आँगन में
तुम दीप जला लो आँगन में!!
कर लो रोशन हर एक अंग,
मन पर छाये अद्भुत उमंग
अब कुदरत की पावनता का,
अम्बार लगा लो आँगन में!
तुम दीप जला लो आँगन में!!
 - देवेंद्र प्रताप सिंह

अमित ओमर

PC: अमर उजाला

हो जीवन मे घोर निराशा
दिल मे न हो चैन जरा सा
मन मे एक संकल्प जगाएं
आशा का एक दीप जलाएं।

जीवन जीना बहुत कठिन हो
सफर बड़ा हो, राह जटिल हो
भले  दूर हो अभी  सवेरा
चारो ओर ही दिखे अंधेरा

खुद को इक विश्वास दिलाएं
आशा का एक दीप जलाएं।
- अमित ओमर

राजेन्द्र अवस्थी

PC: अमर उजाला

हम सब मिल कर दीप जलाएं

जब धरा अदृश्य मृत्यु के भय से आशंकि उद्दयोलित हो।
घोर निराशा के मेंघो से गगन पूर्ण अक्षादित हो।
दृढप्रतिज्ञ संकल्प शक्ति से इस तम को हम दूर भगाएं।
विश्व विजय का बिगुल बजाएं।
हम सब मिलकर दीप जलाएं।
        
- राजेन्द्र अवस्थी
 

डॉ मनोज गुप्ता

PC: अमर उजाला

भारती  की  आरती  के  वास्ते हम,
दीपकों से जगमगा दे इस धरा को ।
दिव्य ज्योति की निकलती ऊर्जा से
राष्ट्र से सरपट भगा दें आपदा को ।।

एकता  के  सूत्र  में  जब देश होगा,
निश्चय ही सुखमय नया परिवेश होगा,
हम  कहे  जाएंगे  सच्चे भारतीय तब,
मान्य  जब  राज्य का आदेश होगा ।।
दियों  की  जगमग  दमकती श्रंखला में,
हम दिखा दें निज सनातन आस्था को ।

दिव्य ज्योति की निकलती ऊर्जा से
राष्ट्र से सरपट भगा दें आपदा को ।।
- डॉ मनोज गुप्ता

अंशुमान दीक्षित

PC: अमर उजाला

निराशा को दूर भगाना हैं,
आशाओं का दीप जलाना है,
कोई नहीं अकेला यहाँ,
सबको यह भान कराना है..
सब मिलकर ही जीत सकेंगें,
जन जन को यह समझाना है..
अंशुमन हम सब संकल्प करे ये,
अबकी कोरोना को हराना है..!!

-  अंशुमान दीक्षित

विवेक मिश्र

PC: अमर उजाला

वक़्त है मुश्किल हम सबका
 सब मिलकर संकल्प करें
रहते थे कभी पास पास तब
आज दूरियां बनाकर रहे
खत्म होगा सन्नाटो का ये दौर भी
सिर्फ घरों में रहकर इंतजार करें
आओ आज नवदीप जलाकर
रोशनी की किरण जगाकर 
अपने ईश्वर पर विश्वास करें
कोरोना रूपी अंधकार दूर करें
- विवेक मिश्र
 

आई.एन शुक्ला

PC: अमर उजाला

कोरोना को भगाना है, हमने भी आज ठाना है, 
घर-घर दीप जलाना है, महामारी से छुटकारा पाना है, 
और नहीं अब वक्त गंवाना है, कोरोना को भगाना है
घर-घर दीप जलाना है,कुलीन मंसूबों को अब सबक सिखाना है,
नौ मिनट के अंधेरे के बाद फिर उजाला ही उजाला हो हर तरफ
खुद को एक सच्चा देशवासी कहलाना है, 
हमने भी आज ठाना है, कोरोना को भगाना है,,,
- आई.एन शुक्ला

प्रमिला पान्डेय

PC: अमर उजाला

अब मिटेगा तिमिर सारा आओ  नौ दीपक जलायें
मन को शीतल तन  निरोगी जो करे वो गीत गायें।
रोशनी को बांधकर एक सूत्र में हम  ये बता दें।
टिक नही सकता है दुश्मन कोई भी हो भाग जाये
नौ बजे ही नौ दिये हम द्वार देहरी पर सजायें
सोच मौला मौलवी   दुश्मन बने क्यों   खुद के तुम।
रहम कर अपने ही ऊपर बन्दों को कुछ दे सदायें
मानकर आदेश अपने मुखिया का हम  देश वासी
फिर धरा को जगमगा कर दीप दीवाली मनायें।।
- प्रमिला पान्डेय
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