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तूफानों से आंख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो...

काव्य डेस्क

Halchal
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                            अमर उजाला के काव्य महाकुंभ में काव्य वेबसाइट लॉन्च के बाद मुशायरे और काव्य सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गीत सम्राट गोलपादास नीरज, राहत इंदौरी, संतोष आनंद, हरिओम पंवार, कीर्ती काले, शबीना अदीब ने अपनी रचानाएं पेश की। तेज नारायण शर्मा के संचालन में हुए इस कार्यक्रम में एक से बढ़कर एक रचनाएं पेश की गई हैं। राहत इंदौरी ने अपने शेर से महफिल लूट ली। राहत इंदौरी ने कहा कि इस कार्यक्रम में सिर्फ राहत इंदौरी का सम्मान नहीं हुआ है बल्कि उर्दू का सम्मान हुआ है। राहत इंदौरी ने गजल पेश की। इंदौरी ने कहा-
        
                                                    
                            

तूफानों से आंख मिलाओ, सैलाबों पर वार करो
मल्लाहों का चक्कर छोड़ो, तैयार कर दरिया पार करो
फूलों की दुकानें खोलो खुशबू का व्यापार करो
इश्क खता है तो इस खता को सौ बार करो आप हिंदू, मैं मुसलमां, ये इसाई, वो सिख
यार छोड़ो ये सियासत है, चलो इश्क करें आज हम दोनों को फुर्सत है चलो इश्क करें
इश्क दोनों की जरूरत है चलो इश्क करें

इंदौरी ने आगे एक और नज्म पेश की। उसके बोल थे-

कश्ती तेरा नसीब चमकदार कर दिया
इस हार के थपेडो ने उस पार कर दिया
अफवाह थी कि मेरी तबियत खराब है 
लोगों ने पूछ पूछ कर बीमार कर दिया
दो गज सही मगर ये मेरी मिल्कियत तो है 
ऐ मौत तूने मुझे जमींदार कर दिया
मेरी हर बात मोहब्बत में गंवारा करके 
दिल के बाजार में बैठे हैं खसारा करके
आसमानों की तरफ फेंक दिया है 
मैंने चंद मिट्टी के चिरागों को सितारा करके
मैं वो दरिया हूं कि हर बूंद भंवर है जिसकी 
तुमने अच्छा ही किया मुझसे किनारा करके
आते जाते है कई रंग मेरे चेहरे पर 
लोग लेते हैं मजा जिक्र तुम्हारा करके
मुंतजिर हूं कि सितारों की जरा आंख लगे
चांद को छत पर बुला लूंगा इशारा करके 

प्रसिद्ध गीतकार संतोष आनंद ने कहा कि मेरा मजहब सिर्फ प्यार है। राज इलाहाबादी का एक शेर उन्होंने पढ़ा कि 

मुझे तो उसी की सजा मिली है
कि मैंने कोई खता ही नहीं की  

उन्होंने कहा कि वह अब 6 साल की एक बच्ची के लिए जी रहे हैं। उस बच्ची को वह झांसी की रानी लक्ष्मी बाई से भी ज्यादा देशभक्त और बहादुर बनाएंगे। इस कार्य में हालांकि ईश्वर ने अब तक उनको कोई सहयोग नहीं किया है। अब 79 साल का हो गया हूं। किसी से कुछ मांगा नहीं है। मेहनत और तपस्या कर रहा हूं। आने लायक नहीं आया था पर प्यार के नाम पर चला आया। उन्होंने 
बोला कि- 

तुम्ही से प्यार करता हूं
तुम्ही पे जान देने आया हूं 
आखिरी वक्त है इम्तिहान ले ले 

नजारे नजर से ये कहने लगे
नैन से बड़ी चीज कोई नहीं 
तभी मेरे दिल ने ये आवाज दी 
वतन से बड़ी चीज कोई नहीं 

मुझे जिंदगी मिली तो मगर
रहा बेअसर मेरा हर हुनर
मौत तक भी उदास है
मेरा गीत जीत जिसका लिबास है
उस अजनबी की तलाश है

हास्य कवि प्रदीप चौबे ने कहा कि उन्होंने इस समारोह में गोपाल दास नीरज जी को काफी समय बाद देखा। एकाएक उनके मुख से निकल पड़ा कि अरे नीरज जी आप अभी हैं? उन्होंने कहा कि उनका मतलब था कि आप अभी भी मंच पर हैं। चौबे ने संता और बंता पर अंतर स्पष्ट करते हुए कहा कि-

अगर बेसन नहीं सनता 
तो पकौड़ा नहीं बनता 

वीर रस के कवि हरिओम पंवार ने ओज भरी कविता से माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया। उनके बोल थे।

'मैं भी गीत सुना सकता हूं शबनम के अभिनन्द के
मै भी ताज पहन सकता हूं नंदन वन के चन्दन के
लेकिन जब तक पगडण्डी से संसद तक कोलाहल है
तब तक केवल गीत पढूंगा जन-गण-मन के क्रंदन के'

'जब पंछी के पंखों पर हों पहरे बम के, गोली के
जब पिंजरे में कैद पड़े हों सुर कोयल की बोली के
जब धरती के दामन पार हों दाग लहू की होली के
कैसे कोई गीत सुना दे बिंदिया, कुमकुम, रोली के'

'किसका खून नहीं खौलेगा पढ़ के अखबारों 
सिंहों के सिर कटवा दिए चूहों के दरबारों में'

दिल्ली वालों अपने मन को बुद्ध करो या क्रुद्ध करो
कश्मीर को दान करो या गद्दारो से युद्ध करो 

92 साल के नीरज ने भी अपनी कविताएं पेश की। नीरज को इस कार्यक्रम अमर उजाला काव्य रत्न से सम्मानित्त किया गया। 

एक सत्र रहा महिला शक्ति के नाम काव्य महाकुंभ में एक सत्र महिला कवित्रियों के नाम रहा। इस कार्यक्रम में कीर्ति काले, शबीना अदीब, डॉ शशि तिवारी, सपना सोनी, डॉ रूचि चर्तुवेदी, चेतना शर्मा, नूतन अग्रवाल और ज्योत्सना शर्मा ने कविताएं पेश की। सभी कविताओं के विषय महिला सशक्तिकरण और महिला जीवन की दुश्वारियों से जुड़े रहे। 

कविता पेश करते हुए कवियत्री कीर्ति काले ने शानदार पंक्तियों से नारी के ओज का परिचय दिया...

'सरल नहीं है कविता लिखना, पूछो हम फनकारों से 
हम सब लोहा काट रहे हैं, कागज के फनकारों से'

कवियत्री रूचि चतुर्वेदी ने मां शारदे की वंदना कर सबको भक्ति भाव से भर दिया। 

ज्योत्सना शर्मा ने नारी शक्ति को रेखांकित करती हुईं लाइनें सुनाकर उपस्थित श्रोताओं को वाह-वाह कहने पर मजबूर किया। उनके बोल थे- 

मैं नारी नारायण तू ये पदवी मैने पाई
छीन लिया अस्तित्व मेरा क्यों लाज नहीं आई   

उनके बाद नूतन अग्रवाल जी ने बड़ी सशक्त वाणी से काव्य पाठ किया। उनके बोल थे-

'कलम की भाव रचने को स्याही सम्मान की भर दी
नया इतिहास लिखने को नई शुरुआत कर दी
सुबह होगा उजाला तो बनेंगे सुर्खियां हम भी
सजाकर शाम सम्मानित अमर यादें सभी कर दीं'

इन सभी महिला कवियों को अमर उजाला द्वारा सम्मानित्त भी किया गया।
 
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