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68 साल पुराना प्रेम गीत कैसे कोरोना से बचाव का हिस्सा बन गया, वायरल हो रहे हैं बोल

दीपाली अग्रवाल

Halchal
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कोरोना महामारी की मार इस समय समूचे विश्व में है। इससे बचने के लिए अनेक उपाय बताए जा रहे हैं ताकि इसे फ़ैलने से रोका जा सके। मसलन लोगों से दूर से बात की जाए, उन्हें स्पर्श करने से बचा जाए और बार-बार हाथ धोए जाएं। यह वायरस के ज़रिए फ़ैलने वाली बीमारी है जिसमें खांसी-जुकाम के साथ बुखार और सांस लेने में तक़लीफ़ की समस्या जैसे लक्षण हैं। अगर आप ऐसे किसी व्यक्ति के संपर्क में आते हैं तो आप इसकी चपेट में आ सकते हैं।

फ़िलहाल इसके टीके व दवाईयां खोजी जा रही हैं फिर भी हमारी ज़िम्मेदारी है कि निर्देशों का पालन करें और ख़ुद को सजग रखें। इसमें सबसे ज़रूरी है लोगों से उचित दूरी। इसी बात को समझाते हुए इन दिनों सोशल मीडिया पर एक गीत वायरल हो रहा है। यह गीत 1952 में आयी फ़िल्म साक़ी का है। गाना प्रेमनाथ और मधुबाला पर फ़िल्माया गया है। फ़िल्म का संगीत सी रामचंद्र ने दिया था और बोल राजेंद्र कृष्ण ने लिखे हैं।

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इसका मुखड़ा कोरोना के निर्देशों को आसान भाषा में समझा रहा है। इसका सार बड़ा आसान है कि दूर से बात कीजिए, हाथ तो बिल्कुल मत लगाइए क्यूंकि हाथों से संक्रमण का खतरा सबसे ज़्यादा है। चूंकि आप संक्रमित हाथों से अपने मुंह को छुएंगे और वायरस सीधे श्वांस के द्वारा आपके भीतर पहुंच जाएगा। सो सारे नज़ारे और सारे इशारे दूर से ही किए जाएं तो भले।

दूर से दूर से जी दूर से हो दूर से 
दूर दूर से हां जी दूर दूर से

पास नहीं आइए, हाथ ना लगाइए
कीजिए नज़ारा दूर दूर से
कीजिए इशारा दूर दूर से 

हालांकि यह एक प्रेम गीत है। जो प्रेम के शुरुआती दौर में सचेत करता है। चूंकि पहली सीढ़ी तो सबको आसान लगती है लेकिन आगे बढ़ने पर अगर बेवफ़ाई मिले तो न ऊपर जाते बनेगा न पीछे लौटते। लेकिन, विस्मय है कि कैसे एक प्रेम गीत आज एक महामारी के प्रति सचेत कर रहा है। इससे स्पष्ट है कि शब्द अपने मा’ने भले बदल लें लेकिन उनका महत्व जो 1952 में था वही आज 2020 में भी उतना ही है।

गीतकार ने कभी न सोचा होगा कि उनके लिखे बोल इतने साल बाद यूं वायरल हो जाएंगे वो भी किसी बीमारी के प्रति सजगता को लेकर। बहरहाल, आप आगे पूरे बोल पढ़ें लेकिन मुखड़े को आज के समय के हिसाब से ही समझें कि इन दिनों सारे नज़ारे और सारे इशारे ‘दूर-दूर से’ 

पहला उसूल है प्यार के दरबार का
अर्ज़ी में हाल लिखो दिले बेक़रार का
आगे मत जाइए होश में आ जाइए
कीजिए नज़ारा दूर दूर से



प्यार के मुआमले में जल्दी न कीजिए
अच्छी तरह सोचिए फिर दिल दीजिए
हुस्न दग़ाबाज़ है पहले आजमाइए
कीजिए नज़ारा दूर दूर से 

दिल को लगाना है तो ज़रा देख भाल के
दाव बड़े टेढ़े हैं हसीनों की चाल के
नज़रों की प्यास को दूर से बुझाइए
कीजिए नज़ारा दूर दूर से

6 वर्ष पहले
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