विज्ञापन

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की हाइकु कविता- व्याकुल गाँव

काव्य डेस्क

Haiku
विज्ञापन
                                    
                     
                                                  1
व्याकुल गाँव
व्याकुल होरी के हैं
घायल पाँव ।

2
कर्ज़ का भार
उजड़े हुए खेत
सेठ की मार ।

3
बेटी मुस्काई
बहू बन पहुँची
लाश ही पाई । 
विज्ञापन

यह जनता
मेले में गुमशुदा 
अबोध शिशु

5
नई सभ्यता
आंगन में उगाते
हैं नागफनी

6
दाएँ न बाएँ
खड़े हैं अजगर
किधर जाएँ ।

लूट रहे हैं
सब पहरेदार 
इस देश को

8
मौत है आई
जीना सिखलाने को 
देंगे बधाई ।

9
मैं नहीं हारा
है साथ न सूरज
चाँद न तारा ।

10
साँझ की बेला
पंछी ॠचा सुनाते
मैं हूँ अकेला ।
7 वर्ष पहले
विज्ञापन

विशेष

आज के शीर्ष कवि Show all

Anil Pandey

437 कविताएं

View Profile