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सुधा गुप्ता की हाइकु कविता- जंगल को गाने दो  

काव्य डेस्क

Haiku
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मनमौजी है
जंगल को गाने दो
अपना गीत
2
हरे पन्ने पे
रचते आरण्यक
ये वन -ॠषि
3
इन्हें न काटो
पावन वेद-ॠचा-
सी यह सृष्टि
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4-

ममतामयी
जड़-चेतन प्रति
वत्सल दृष्टि
5
तृषा बुझाने
इनके कारण ही
होती है वृष्टि
6
गीत बुनती
गहरे सन्नाटे में
कोई गौरैया
7
बोल उठता
अचानक मस्ती में
वो पपीहरा

8-

असंख्य जीव
पाते हैं संरक्षण
इनकी गोद
9
कस्तूरी मृग
निर्भय विचरण
मनाते मोद
10
मत उजाड़ो
सबको कुछ देता
कुछ न लेता
11
कभी न छीनो
वन्य जीवों का घर
भू रही चेता

12-

स्वाधीन ,मुक
स्वयं की मस्ती डूबा
सबका मीत
13
आत्मविभोर
प्रभु-भक्ति में लीन
सबसे प्रीत
14
मनमौजी है
जंगल को गाने दो
अपना गीत
7 वर्ष पहले
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