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'फ्रैंकेंस्टाइन' का शीर्षक चरित्र इस प्रसिद्ध वैज्ञानिक के नाम पर है ....

काव्य डेस्क

Book Review
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                                                  'फ्रैंकेंस्टाइन' को विश्व साहित्य में विज्ञान फंतासी लेखन की शुरुआत भी माना जाता है और इस विषय पर अब तक लिखी गईं कृतियों में मील का पत्थर भी। इंग्लैंड के रॉयल मिंट ने अभी एक ऐसा सिक्का जारी किया है, जो इतिहास के किसी महानायक या किसी बड़ी ऐतिहासिक घटना को नहीं, एक साहित्यिक कृति को समर्पित है। 

अंग्रेजी की जिस कृति को यह दुर्लभ सम्मान प्राप्त हुआ है, वह कृति है ब्रिटिश लेखिका मैरी शेली का 1818 में लिखा विश्वप्रसिद्ध उपन्यास 'फ्रैंकेंस्टाइन'। 'द मॉडर्न  प्रोमिथियस' इस उपन्यास का उप-शीर्षक है। इस साल यह कालजयी उपन्यास अपनी उम्र का दो सौ साल पूरे कर चुका है। मैरी (1797-1851) 19वीं सदी की अंग्रेजी उपन्यासकार, कथाकार, नाटककार थीं, जिन्हें मुख्य रूप से उनके उपन्यास 'फ्रैंकेंस्टाइन' के लिए जाना जाता है। 
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18 साल की उम्र में उपन्यास लेखन

उन्होंने यह उपन्यास लिखना जब शुरू किया, तो उनकी उम्र मात्र 18 साल थी। गॉथिक शैली में लिखा हुआ यह उपन्यास जब पहली बार लंदन के एक छोटे से प्रकाशक मेयर एंड जोन्स ने एक जनवरी 1818 को प्रकाशित किया, तो अपनी विचित्र कथावस्तु और लेखन शैली की वजह से इसने अंग्रेजी पाठकों का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया था।

 आश्चर्य यह कि उपन्यास के पहले संस्करण में मैरी  ने लेखक के तौर पर अपना नाम नहीं दिया था। इसे अज्ञात नाम से प्रकाशित किया गया। हालांकि इसमें उनके पति पर्सी शेली द्वारा लिखी प्रस्तावना में इसे मैरी के पिता विलियम गॉडविन को समर्पित किया गया था। 

जब इस उपन्यास को आशातीत लोकप्रियता मिली, तो शेली का नाम 1823 में फ्रांस में दो भागों में प्रकाशित उपन्यास के दूसरे संस्करण में दिया गया। उपन्यास की उत्पति के संबंध में एक नई प्रस्तावना भी लिखी थी।

दैत्य द्वारा अपने भाई और पत्नी सहित तीन लोगों की हत्या के बाद....

 यह लोकप्रिय संस्करण मूल उपन्यास से भी ज्यादा पढ़ा गया। उपन्यास 'फ्रैंकेंस्टाइन' का शीर्षक चरित्र विक्टर फ्रैंकेंस्टाइन नाम का एक वैज्ञानिक है, जिसे जीवन की उत्पति और विनाश के अध्ययन में दिलचस्पी थी। 

इसकी तह में जाने के लिए उसने कई रासायनिक प्रक्रियाओं का सहारा लिया। अपनी मां की मौत के बाद उसने जीवित प्राणियों के क्षय की प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन शुरू किया। इसके लिए उसने मुर्दाघरों से मानव शवों को और कसाईखानों से मरे पशुओं की हड्डियां तक एकत्रित की।

लंबे प्रयोगों के बाद अंततः उसे जीवन के निर्माण की अंतर्दृष्टि प्राप्त हुई। इस निर्माण के बाद विक्टर अनजाने में ही अपने और अपने परिवार तथा दोस्तों के जीवन को खतरे में डाल देता है। 

इस दैत्य द्वारा अपने भाई और पत्नी सहित तीन लोगों की हत्या के बाद विक्टर को प्रकृति में अनावश्यक हस्तक्षेप कर संकट पैदा करने के लिए पछतावा होता है और वह अपनी ही कृति के विरुद्ध निर्णायक लड़ाई लड़ने को विवश होता है। 

फ्रैंकेंस्टाइन और दैत्य इसी अकेलेपन की उपज हैं

उपन्यास 'फ्रैंकेंस्टाइन' वस्तुतः अकेलेपन का महाकाव्य है। इसकी संरचना में हर जगह अकेलेपन का वह विस्तार है, जो व्यक्ति को कहीं हताश करता है, कहीं कुंठित और कहीं उसे हिंसा से भर देता है।

उपन्यास के तीनों मुख्य पात्र- वॉल्टन, फ्रैंकेंस्टाइन और दैत्य इसी अकेलेपन की उपज हैं। 'फ्रैंकेंस्टाइन' को विश्व साहित्य में विज्ञान फंतासी लेखन की शुरुआत भी माना जाता है और इस विषय पर अब तक लिखी गईं कृतियों में मील का पत्थर भी। 

मैरी शेली खुद विज्ञान की अध्येता नहीं थी। उनका दावा था कि इस उपन्यास की परिकल्पना का आधार, उनका देखा हुआ एक सपना था। इसकी शुरुआत मैरी ने एक लघु कथा के रूप में की, लेकिन पति पर्सी शेली के प्रोत्साहन के बाद उन्होंने इसे एक उपन्यास का फैलाव और आकार दिया। 

हालांकि कुछ आलोचक इसे विज्ञान फंतासी की जगह हॉरर उपन्यास मानते हैं। आलोचक ऑर्थर बेलेफेंट ने इस उपन्यास को एक मनोवैज्ञानिक कृति माना है। 

आलोचकों को यह उपन्यास बहुत पसंद आया

तमाम शुरुआती आलोचनाओं के बावजूद  'फ्रैंकेंस्टाइन' को इसकी रोमांचकता की वजह से दुनियाभर के पाठकों ने हाथों-हाथ लिया। पिछली सदी के आलोचकों को यह उपन्यास बहुत पसंद आया और इसे साहित्य में मनोवैज्ञानिक और वैज्ञानिक परिकल्पना की उपलब्धि माना गया। 

20वीं सदी में इस उपन्यास की लोकप्रियता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि इसके दर्जनों संस्करण छपे और दुनिया भर में इसके सैकड़ों नाट्य रूपांतरण हुए। 1994 में इसी उपन्यास के आधार पर इसी नाम से निर्देशक केनेथ ब्रनाघ ने एक बेहद लोकप्रिय फिल्म भी बनाई थी। कहानी विक्टर के नैतिक पतन का अध्य्यन है और इस कहानी में वैज्ञानिकता का पहलू विक्टर की कल्पना के सिवा कुछ भी नहीं। 

किताब- फ्रैंकेंस्‍टाइन
लेखिका-  मैरी शेली
प्रकाशक - लैकिंग्टन, ह्यूजेस, हार्डिंग, मेवर एंड जोन्स, लंदन
वर्ष - 1818 
8 वर्ष पहले
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