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आज का शब्द: राशि और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला की कविता- सुख का दिन डूबे डूबे जाए

काव्य डेस्क

Aaj Ka Shabd
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                            सुख का दिन डूबे डूबे जाए ।
        
                                                    
                            
तुमसे न सहज मन ऊब जाए ।

खुल जाए न मिली गाँठ मन की,
लुट जाए न उठी राशि धन की,
धुल जाए न आन शुभानन की,
सारा जग रूठे रूठ जाए ।

उलटी गति सीधी हो न भले,
प्रति जन की दाल गले न गले,
टाले न बान यह कभी टले,
यह जान जाए तो ख़ूब जाए ।

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5 महीने पहले
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