साहित्य चिंतन का संसार है और लेखन ऋषियों की दुनिया। लेखन-पठन की परंपरा में शब्द साधना करते लेखकों को हमारी परंपरा में ऋषि ही तो कहा गया है। शब्दों के इस संसार के बारे में प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने कहा है- ''जिसने शब्दों को जान लिया और पहचान लिया वह इस लोक, परलोक दोनों ही जगह सुखी है।''
अमर उजाला परिवार शब्दों की इसी महान परंपरा को सम्मानित करने जा रहा है। उस श्रेष्ठतम् सृजन को रेखांकित कर रहा है जो साहित्य के विश्व में अर्थों के साथ नया संसार रच रहा है। रचनाकारों की उस रचनाधर्मिता को नमन कर रहा है जो इसी शब्द संसार के भीतर जीवन का सुख-दुख रचती है। जीवन अवकाश के भीतर उसके मायने तलाशती है और सभ्यता के सामने मनुष्यता के नित् नये मानकों को तय करती है।
प्रथम अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 की रंगारंग शुरुआत नई दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन में हो चुकी है। शब्द संस्कृति और परंपरा के सम्मान समारोह के अंतर्गत अमर उजाला परिवार शब्दों की महान परंपरा को सम्मानित करने जा रहा है। सामयिक श्रेष्ठतम् सृजन को रेखांकित कर रहा है जो साहित्य के विश्व में अर्थों के साथ नया संसार रच रहा है। रचनाकारों की उस रचनाधर्मिता को नमन कर रहा है जो इसी शब्द संसार के भीतर जीवन का सुख-दुख रचती है। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत रत्न और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मंचासीन हैं। इसके अलावा समारोह में विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ प्रमुख कथाकार व कवि भी मौजूद हैं।
क्या है अमर उजाला शब्द सम्मान 2018?
अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 के अंतर्गत शब्द सम्मान के रूप में छः अलंकरणों की स्थापना की गई है। यह सम्मान अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल दिया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत साहित्य के दो सर्वोच्च सम्मान, एक हिंदी और एक किसी अन्य भारतीय भाषा में सतत् विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए दिया जाएगा। सम्मान राशि के रूप में 5-5 लाख रुपए अर्पित किए जाएंगे। यही नहीं एक अलंकरण हिंदी में किसी भी लेखक की पहली कृति के लिए प्रदान किया जाएगा। तीन अलंकरण, कथा-कविता और गैर कथा श्रेणियों में साल की श्रेष्ठतम् कृतियों को समर्पित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त एक विशेष अलंकरण अनुवादित रचना को समर्पित होगा। ये सभी सम्मान एक-एक लाख रुपए की राशि के सम्मान के साथ समर्पित किए जाएंगे।
अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 के अंतर्गत शब्द सम्मान के रूप में छः अलंकरणों की स्थापना की गई है।PC: अमर उजाला
सर्वोच्च सम्मान आकाशदीप
आकाशदीप सर्वोच्च अलंकरण किसी भी सर्जक के समग्र अवदान, अनवरत रचनाधर्मिता और मानवीय मूल्यों के संवर्धन में श्रेष्ठतम भूमिका के सम्मान में अर्पित किया जाएगा। यह सर्वोच्च सम्मान एक हिंदी भाषा और एक अन्य भारतीय भाषा की विभूति को दिया जाएगा। सतत राह दिखाने वाली रोशनी का प्रतीक आकाशदीप अलंकरण - पांच-पांच लाख रुपए की सम्मान राशि के साथ प्रदान किया जाएगा।
नामवर सिंह को आकाशदीप सम्मान
इस साल का पहला आकाशदीप सम्मान हिंदी के प्रख्यात आलोचक डॉक्टर नामवर सिंह और हिंदीतर भाषाओं में विख्यात कलाकर्मी-चिंतक गिरीश कारनाड को दिया जाएगा। 28 जुलाई 1926 को उत्तर प्रदेश जीयनपुर, वाराणसी से आने वाले नामवर सिंह हिंदी आलोचना के शीर्षस्थ रचनाकार हैं। वे एक समालोचक, निबंधकार, संपादक रहे हैं। साहित्य के संसार में उनकी जीवन यात्रा हिंदी के अपभ्रंश साहित्य से लेकर समसामयिक साहित्य तक फैली हुई है। नामवर सिंह ने हिंदी साहित्य की पीढ़ियों को प्रभावित किया है।
वे अपने समकालीन लेखकों से लेकर युवा रचनाशीलता तक को स्पर्श करते हैं। नई और पुरानी पीढ़ी पर उनकी छाया की छाप देखी जा सकती है।
साहित्य को लेकर नामवर सिंह का कहना है- साहित्य को लेकर मैं एक ही सिद्धांत मानता रहा हूं। साहित्य में सह शब्द है। साहित्य में शब्द भी सुंदर हो और अर्थ भी सुंदर हो तो साहित्य होता है। सह भाव साहित्य का धर्म है, इसलिए वही साहित्य श्रेष्ठ होगा जो साहित्य धर्म का पालन करेगा।
गिरीश कारनाड को आकाशदीप सम्मान
दूसरा सर्वोच्च आकाशदीप सम्मान प्रसिद्ध नाटककार, रंगकर्मी और अभिनेता गिरीश कारनाड को दिया गया है। 19 मई 1938 को महाराष्ट्र में मुंबई से सटे माथेरान में जन्मे गिरीश कारनाड नाटककार, फिल्म निर्देशक और स्वयं भी कलाकार रहे हैं। उन्होंने हिंदी की कई चर्चित और गंभीर फिल्मों में महत्वपूर्ण चरित्र पात्रों को जिया है। उन्हें संगीत नाटक अकादेगी पुरस्कार, भारत के सर्वोच्च पुरस्कारों में से एक पद्मश्री और पद्मभूषण से भी सम्मानित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त वे कन्नड़ साहित्य अकादेमी पुरस्कार, साहित्य एकादेमी पुरस्कार, ज्ञानपीठ पुरस्कार, कालीदास सम्मान, टाटा लिटरेचर लाइव लाइफटाइम अचीवमेंट जैसे सम्मानों से सम्मानित हैं जबकि सिनेमा के क्षेत्र में उनके नाम पुरस्कारों की लंबी फेहरिस्त है।
अमर उजाला शब्द सम्मान-2018PC: अमर उजाला
श्रेष्ठ कृति सम्मान-छाप मनीष वैद्य/आर.चेतन क्रांति/ अनिल यादव को
श्रेष्ठ कृति सम्मान-छाप हिंदी की तीन श्रेणियों - कथा(कहानी/उपन्यास), कविता तथा गैर-कथा (रिपोर्ताज, व्यंग्य, निबंध, यात्रा वृत्तांत, पत्रकारिता, संस्मरण, आलोचना, मानविकी आदि सम्मिलित) में वर्ष की ऐसी श्रेष्ठ कृतियों को जो गहरे तक अपनी छाप छोड़ गई हों, के लिए दिया जाएगा। प्रत्येक श्रेणी की सम्मान राशि एक लाख रुपए है।
प्रथम वर्ष के लिए कथा श्रेणी के अंतर्गत कहानी संग्रहों पर विचार किया गया है। कहानियों के लिए यह सम्मान इस वर्ष मध्य प्रदेश के कथाकार और पत्रकार मनीष वैद्य को श्रेष्ठ कथा के लिए उनकी पुस्तक 'फुगाटी का जूता' के लिए दिया गया है। मनीष पेशे से पत्रकार भी हैं और स्वतंत्र लेखन कर रहे हैं। उन्होंने राहुल सांस्कृत्यायन पर शोध किया है। उनकी कहानियां हिंदी की प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रही हैं। इससे पूर्व उन्हें प्रेमचंद सृजनपीठ सम्मान, यशवंत अरगरे सकारात्मक पत्रकारिता सम्मान, प्रतिलिपी सम्मान और वागीश्वरी सम्मान भी मिल चुका है।
कविता के लिए आर.चेतन क्रांति के कविता संग्रह वीरता पर विचलित को। आर.चेतन क्रांति उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के उमरी कलां में जन्मे हैं। वे कविता के अलावा पत्र-पत्रिकाओं में भी समसामयिक और विविध विषयों पर लेखन करते रहे हैं। वे पेशे पत्रकार भी रहे हैं। उन्हें सीलमपुर की लड़कियां कविता संग्रह के लिए 2001 का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार भी मिल चुका है।
तीसरा श्रेष्ठ कृति सम्मान-छाप कथेतर में पत्रकार और लेखक अनिल यादव को उनकी किताब सोनम गुप्ता बेवफा नहीं है के लिए दिया गया है। दो दशक से ज्यादा समय तक पत्रकार और रिपोर्टर रहे अनिल यादव बेहद संवेदनशील और गंभीर लेखक हैं। इसके पूर्व उनकी दो और किताबें जिनमें एक कहानी संग्रह- नगर वधुएं अखबार नहीं पढ़तीं और वह भी कोई देस है महराज है जो चर्चा में रही है।
श्रेष्ठ कृति सम्मान-थाप/प्रवीण कुमार/ गोरख थोरात
हिंदी में किसी भी रचनाकार की पहली प्रकाशित मौलिक कृति के लिए यह सम्मान, रचनाकर्म की पहली थाप को समर्पित है। उम्र की इसमें कोई सीमा नहीं है और सम्मान राशि एक लाख रुपए है। ये विधाओं में से अंतरित क्रम से दिए जाएंगे। प्रथम वर्ष के लिए विधा क्षेत्र ‘कथा’(कहानी/उपन्यास) रखा गया है।
श्रेष्ठ कृति सम्मान-थाप लेखक प्रवीण कुमार को पहली किताब छबीला रंगबाज का शहर के लिए दिया गया है। प्रवीण कुमार बिहार के आरा शहर से आते हैं और इस समय दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं। उनकी कहानियां हिंदी की प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में उनकी प्रकाशित और चर्चित हुई हैं।
दूसरा श्रेष्ठ कृति सम्मान-थाप महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के संगमनेर से आने वाले अनुवादक और लेखक गोरख थोरात को वरिष्ठ मराठी लेखकर भालचंद्र नेमाड़े की मराठी पुस्तक 'देखणी' के श्रेष्ठ अनुवाद के लिए दिया गया है। देखणी मराठी के वरिष्ठ और लोकप्रिय लेखक भालचंद नेमाड़े द्वारा लिखी गई है। गोरख थोरात मराठी की लोकप्रिय लेखकों की महत्वपूर्ण किताबों के अनुवाद का कार्य कर चुके हैं।
कौन रहा निर्णायक मंडल में?
सम्मानित लेखकों और उनकी कृतियों के मूल्यांकन व चयन के लिए अमर उजाला फाउंडेशन द्वारा गठित सर्वोच्च निर्णायक मंडल द्वारा किया गया है। अमर उजाला फाउंडेशन के शब्द सम्मान निर्णायक मंडल के पास चयन या नामांकन के समस्त अधिकार निहित हैं और प्रत्येक स्थिति में उनका निर्णय अंतिम और सर्वमान्य होता है। निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध कथाकार ज्ञानरंजन, वरिष्ठ आलोचक विश्वनाथ त्रिपाठी, विख्यात कवि मंगलेश डबराल, प्रसिद्ध समीक्षक कवि प्रयाग शुक्ल व सुप्रसिद्ध आलोचक सुधीश पचौरी शामिल हैं।
7 वर्ष पहले