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अमर उजाला शब्द सम्मान 2018: 31 जनवरी को शब्द परंपरा का सम्मान, लेखक-कवि और रंगकर्मी होंगे सम्मानित

अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 का आयोजन एक विशेष समारोह के अंतर्गत नई दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन में 31 जनवरी को शाम 5.30 बजे किया जाएगा।
                
                                                         
                            
साहित्य चिंतन का संसार है और लेखन ऋषियों की दुनिया। लेखन-पठन की परंपरा में शब्द साधना करते लेखकों को हमारी परंपरा में ऋषि ही तो कहा गया है। शब्दों के इस संसार के बारे में प्रसिद्ध आलोचक नामवर सिंह ने कहा है- ''जिसने शब्दों को जान लिया और पहचान लिया वह इस लोक, परलोक दोनों ही जगह सुखी है।''

अमर उजाला परिवार शब्दों की इसी महान परंपरा को सम्मानित करने जा रहा है। उस श्रेष्ठतम् सृजन को रेखांकित कर रहा है जो साहित्य के विश्व में अर्थों के साथ नया संसार रच रहा है। रचनाकारों की उस रचनाधर्मिता को नमन कर रहा है जो इसी शब्द संसार के भीतर जीवन का सुख-दुख रचती है। जीवन अवकाश के भीतर उसके मायने तलाशती है और सभ्यता के सामने मनुष्यता के नित् नये मानकों को तय करती है।
 
प्रथम अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 की रंगारंग शुरुआत नई दिल्ली स्थित त्रिमूर्ति भवन में हो चुकी है।  शब्द संस्कृति और परंपरा के  सम्मान समारोह के अंतर्गत अमर उजाला परिवार शब्दों की महान परंपरा को सम्मानित करने जा रहा है। सामयिक श्रेष्ठतम् सृजन को रेखांकित कर रहा है जो साहित्य के विश्व में अर्थों के साथ नया संसार रच रहा है। रचनाकारों की उस रचनाधर्मिता को नमन कर रहा है जो इसी शब्द संसार के भीतर जीवन का सुख-दुख रचती है।  कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भारत रत्न और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी मंचासीन हैं। इसके अलावा समारोह में विशिष्ट अतिथियों के साथ-साथ प्रमुख कथाकार व कवि भी मौजूद हैं। 

क्या है अमर उजाला शब्द सम्मान 2018?
अमर उजाला शब्द सम्मान 2018 के अंतर्गत शब्द सम्मान के रूप में छः अलंकरणों की स्थापना की गई है। यह सम्मान अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से हर साल दिया जाएगा। सम्मान के अंतर्गत साहित्य के दो सर्वोच्च सम्मान, एक हिंदी और एक किसी अन्य भारतीय भाषा में सतत् विशिष्ट रचनात्मक योगदान के लिए दिया जाएगा। सम्मान राशि के रूप में 5-5 लाख रुपए अर्पित किए जाएंगे। यही नहीं एक अलंकरण हिंदी में किसी भी लेखक की पहली कृति के लिए प्रदान किया जाएगा। तीन अलंकरण, कथा-कविता और गैर कथा श्रेणियों में साल की श्रेष्ठतम् कृतियों को समर्पित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त एक विशेष अलंकरण अनुवादित रचना को समर्पित होगा। ये सभी सम्मान एक-एक लाख रुपए की राशि के सम्मान के साथ समर्पित किए जाएंगे।
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7 वर्ष पहले

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