जिला सहकारी बैंक ने अब सभी शाखाओं को बेहतर स्थिति में लाने की पहल की है। इसके लिए सहकारी समितियों को पुनर्जीवित किया जा रहा है। नए सदस्य बनाए जा रहे हैं। बैंक ने शेयरहोल्डर व खाताधारकों में दिए गए 50 करोड़ लोन दिए हैं। जिला सहकारी बैंक के डीजीएम वीरेंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि सभी खाताधारकों को अब एटीएम कार्ड मुहैया कराने की तैयारी है।
इसे भी पढ़ें: रेलवे अफसर घूस कांड: गोरखपुर में तीसरे दिन भी टीम ने खंगाले अभिलेख, कई फर्मों की फाइलें कब्जे में ली
तो खाली है बैंक का खजाना...वरना रुपये देने पर नहीं बनाते बहाना
नगर सहकारी बैंक में वित्तीय लेन-देन के चक्कर में खाताधारक और उनके वारिस फंस गए हैं। दरअसल, खाताधारकों व नामिनी को बैंक से उनकी जमा पूंजी की रकम नहीं मिल पा रही है। सत्रों की माने तो लंबे समय से लोन की रिकवरी न होने के चलते बैंक के पास पर्याप्त धन ही नहीं है। अभी भी चार करोड़ रुपये की रिकवरी होना है। यही कारण है कि खाताधारक अब अपने रुपये की निकासी के लिए परेशान हैं। हालांकि, अब सचिव ने पहल शुरू की है तो बीते दिनों करीब 50 लाख की रकम बैंक में लोन लेने वालों से जमा कराई गई है।
इसे भी पढ़ें: दो महीने पहले भी गोरखपुर आई थी एनआईए टीम, अबकी पूरी तैयारी से आए अफसर; की पूछताछ
बैंक की खस्ता हालत का उदाहरण खाताधारक नरेंद्र प्रताप सिंह हैं। जिन्होंने करीब 15 वर्ष पहले जंगल कौड़िया सहकारी बैंक की शाखा में अपना खाता खुलवाया था। इनके मुताबिक, इनके खाते में ब्याज और मूलधन मिलाकर कुल 60 हजार रुपये के आसपास जमा था। करीब साढ़े पांच वर्ष पहले इन्होंने अपने खाते से 20 हजार रुपये निकालने का आवेदन किया।
बैंक अधिकारियों ने उनको पांच सौ रुपये देने की बात कहते हुए बताया कि बैंक में पैसे नहीं हैं। इसके बाद उन्होंने बैंक जाना ही बंद कर दिया। ऐसे कई सारे लोग रोजाना बैंक का चक्कर लगा रहे हैं। बैंक से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर पहले के जिम्मेदारों ने बकाएदारों से वसूली की प्रक्रिया सख्ती से अपनाई होती तो शायद रकम नहीं फंसी होती। राहत की बात यह है कि पिछले दिनों में प्रबंधन की ओर से करीब 50 लाख रुपये एनपीए खातों में जमा करवाए गए हैं।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में धूमधाम से मनाया जा रहा ईद मिलादुन्नबी, लोगों ने निकाला जुलूस
जिला सहकारी बैंक ने गोविवि के 344 शिक्षक व कर्मचारियों को विश्वविद्यालय वेतन भोगी समिति के माध्यम से लोन दिए थे। जो ब्याज सहित नौ करोड़ हो गई है। जब शिक्षकों व कर्मचारियों के पास नोटिस गई तो उन्होंने आपत्ति जताई। इसके बाद सचिव ने चार साल की रकम जमा कराई।
इसे भी पढ़ें: 30 सितंबर को वैधता हो रही खत्म: महज दो दिन का मौका, बदल लें दो हजार के नोट
सहकारी बैंक डीजीएम जिला वीरेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि गोरखपुर और महराजगंज में करीब 35 करोड़ की रिकवरी अभी नहीं हो पाई है। इसके लिए प्रयास किया जा रहा है। कुछ सफलता भी मिली है। मार्च 2024 तक बैंक की हालत सुधर जाएगी। समितियों में सदस्य बनाए जा रहे हैं।