नीरज के पत्र की शब्दावली, मुहर सब फर्जी
गुप्ता ने बताया कि कुछ माह पूर्व कनिष्ठ अभियन्ता, रिपोर्टर हिंदी व अंग्रेजी, जूनियर स्केल स्टेनोग्राफर, लिपिक, टेलीफोन अटेंडेंट, टेलीफोन ऑपरेटर, हिंदी टाइपिस्ट, रिकॉर्ड रिस्टोरर और चौंकीदार पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। अंग्रेजी रिपोर्टर पद के लिए साक्षात्कार देने पहुंचे उम्मीदवार नीरज का रोल नंबर संदिग्ध पाया गया। पत्र की शब्दावली, हस्ताक्षर व मुहर सब फर्जी निकले। नीरज सभी दस्तावेज सुरक्षा कर्मियों ने 17 अक्तूबर को रख लिए थे और उसे 18 को बुलाया था।
जितेंद्र के पास अनेक आईडी, खुद को मंत्री का पीए बताता रहा
आरोपी जितेंद्र ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के लिपिक, सहायक इत्यादि पद के खुद के तीन पहचान पत्र बना रखे हैं। वह स्वयं को सरकारी कर्मचारी बताकर नौकरी लगाने के नाम लोगों से रुपये ऐंठता था। कुछ को वह किसी मंत्री का पीए भी बताता रहा। उसने नौकरी दिलाने के नाम पर पांच से 15 लाख रुपये तक प्रति व्यक्ति लिए हैं।
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मार्शल को घूस की पेशकश, हिमाचल से भी कनेक्शन
आरोपी जितेंद्र व उसके एक रिश्तेदार ने जांच के दौरान विधानसभा में मार्शल को घूस की पेशकश भी की। उसने पूछताछ में बताया कि उसने सारे साक्षात्कार, नियुक्ति पत्र की सामग्री हिमाचल प्रदेश के सिरमौर निवासी सतीश भारद्वाज से ली है। अब पुलिस इस कनेक्शन की भी जांच करेगी। जितेंद्र कई भर्ती में उम्मीदवारों को रोल नंबर जारी कोविड का तर्क देकर साक्षात्कार में शामिल होने से रोक देता था। इस दौरान भी उसने अनेक युवाओं से पैसे लिए हैं।