क़ायनात अगर खिलाफ़ है रहने दो।
मैं चिराग हूं यूं ही जलने दो।
कोई बता दे इन्हें।
मेरी दुश्मनी अंधेरों से है।
फिजाओं को यूं ही बहने दो।
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