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चैन नहीं उन वीरों को

                
                                                         
                            चैन नहीं उन वीरों को,
                                                                 
                            
जो देश की सेवा करते हैं।
भारत की शान तिरंगा ,
हाथ लिए वह फिरते हैं।

तान सीना रण में जाते ,
वीर भारत के कहलाते हैं ।
खेले थे कभी तेरी गोद में ,
तेरे लिए ही जीते हैं ।

हिंदू ,मुस्लिम ,सिख ,इसाई
भाई जैसे भाई है।
जेहादी से भुन जाते,
ज्वालाओ में जलते हैं ।

बारूद से बिखर जाते,
फूल बनकर खिलते हैं ।
वीरों के वह वीर सच्चे ,
भारत में ही रहते हैं।

मरने से वह डरते नहीं,
रण में आगे रहते हैं।
शीश भले ही कट जाए,
पिछे कभी ना हटते हैं।

भारत की शान तिरंगा ,
हाथ लिए वह फिरते हैं।
सपनों को पूरा करने ,
वीर भारत के आते हैं।

तन- मन- धन को,
अर्पण करके जाते हैं।
देश की सेवा करने आते,
शहीद होकर जाते हैं।

सिने मे चाहे गोली खाएं,
देश के लिए जीते हैं।
भारत की शान तिरंगा,
हाथ लिए वह फिरते हैं।

कवि - चन्दन सिंह सारंगदेवोत
मो. न.- 9653770070
- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करे।
4 वर्ष पहले

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