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अत्तिला योझेफ़: जल्दी करो, आकर बाढ़ से मुझे बाहर निकालो

Attila József
                
                                                         
                            मुझे डराओ मेरे छिपे हुए देवता,
                                                                 
                            
मुझे तुम्हारा रोष चाहिए, तुम्हारा कोड़ा, तुम्हारी कड़क
जल्दी करो, आकर बाढ़ से मुझे बाहर निकालो

हमें नीचे बुहार दिया जाए

ऐसा न हो कि हमें नीचे बुहार दिया जाए
धूल में मेरी नज़रों तक, एक अंधा
और अभी तक मैं दर्द की छुरी से खेलता हूँ
इंसानी दिल के झेलने के लिए विकट

कितनी आसानी से मैं सुलग रहा हूँ ! सूरज
झुलसाने की स्थिति में नहीं- डरते रहो-
मुझ पर चीख़ते हो, आग को अकेला छोड़ दो
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हमें नीचे बुहार दिया जाए

8 वर्ष पहले

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😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
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