जिन पिताओं को पूर्वाभास था कि
उनकी बच्चियां अंधेरों से डरती हैं
उन्होंने क्यों नहीं सिखाया अंधेरो से लड़ना!
या कुछ दूर साथ चलकर राह में पड़ने वाले गड्ढों और खाइयों का सही अंदाज लगाना ही सिखा देते!
वे उलझे रहे स्वयं में नहीं देखा कि उनसे निकली एक कोमल छाया अकेली रह गयी है!
पिता को कभी ये भी बता देना चाहिये
मेरी जैसी छाया देखकर हमेशा छूने की कोशिश न करना
क्यों कि कभी-कभी किसी जगह मैं भूल जाता हूँ कि मैं पिता हूँ और बन जाता हूँ बस पुरुष
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