आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

जिन पिताओं को पूर्वाभास था कि उनकी बच्चियां अंधेरों से डरती हैं

वायरल काव्य
                
                                                         
                            

जिन पिताओं को पूर्वाभास था कि
उनकी बच्चियां अंधेरों से डरती हैं
उन्होंने क्यों नहीं सिखाया अंधेरो से लड़ना!

या कुछ दूर साथ चलकर राह में पड़ने वाले गड्ढों और खाइयों का सही अंदाज लगाना ही सिखा देते!

वे उलझे रहे स्वयं में नहीं देखा कि उनसे निकली एक कोमल छाया अकेली रह गयी है!

पिता को कभी ये भी बता देना चाहिये
मेरी जैसी छाया देखकर हमेशा छूने की कोशिश न करना

क्यों कि कभी-कभी किसी जगह मैं भूल जाता हूँ कि मैं पिता हूँ और बन जाता हूँ बस पुरुष

आगे पढ़ें

5 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर